कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के दौरान आज भवानीपुर की सड़कों पर वह मंजर देखने को मिला, जिसकी तपिश पूरे राज्य में महसूस की जा रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा के दिग्गज नेता सुवेंदु अधिकारी, जो इस सीट पर एक-दूसरे के धुर विरोधी हैं, मतदान के दौरान एक ही बूथ के बाहर आमने-सामने आ गए। दोनों के बीच की दूरी महज कुछ मीटर थी, लेकिन बयानों के तीर बेहद तीखे रहे।
एक ही घर के बाहर मोर्चा: जब ठहर गई सांसें
घटना चक्रबेरिया इलाके की है, जहाँ ममता बनर्जी सुबह से ही एक बूथ के बाहर एक घर में डेरा डाले हुए थीं। वह वहां काफी देर तक बैठकर स्थिति का जायजा ले रही थीं। तभी अचानक भाजपा उम्मीदवार सुवेंदु अधिकारी भी उसी स्थान पर पहुंच गए।
नजदीकी मुकाबला: दोनों नेता 50 से 60 मीटर के दायरे में मौजूद थे। ममता बनर्जी घर के भीतर से चुनाव की निगरानी कर रही थीं, जबकि सुवेंदु बाहर अपनी रणनीति बना रहे थे।
"ममता का डर अच्छा लग रहा है": सुवेंदु अधिकारी
सुवेंदु अधिकारी ने इस स्थिति का फायदा उठाते हुए मुख्यमंत्री पर सीधा हमला बोला। उन्होंने तंज कसते हुए कहा:
"आज ममता बनर्जी की पुलिस उनके साथ नहीं है, इसलिए उन्हें डर लग रहा है। वह 50-60 लोगों के साथ आई थीं, लेकिन जनता को देखते ही सब भाग खड़े हुए। यह डर देखकर अच्छा लग रहा है। वह इस सीट से कम से कम 30 हजार वोटों से चुनाव हारेंगी।"
ममता का पलटवार: "भाजपा के इशारों पर नाच रहा आयोग"
वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी मौजूदगी के दौरान चुनाव आयोग और केंद्रीय सुरक्षा बलों पर अब तक के सबसे गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा:
अदालत की अवमानना: ममता ने दावा किया कि उनकी पार्टी ने चुनाव आयोग को अदालत की अवमानना का नोटिस भेजा है।
पक्षपात का आरोप: "बाहरी पर्यवेक्षकों को बंगाल लाया गया है जो खुलेआम भाजपा के इशारों पर काम कर रहे हैं। चक्रबेरिया में हमारे सभी पोस्टर-झंडे हटा दिए गए हैं। ये लोग मतदाताओं में केवल आतंक फैलाने आए हैं।"
क्यों अहम है यह मुकाबला?
भवानीपुर ममता बनर्जी का पारंपरिक क्षेत्र है, लेकिन सुवेंदु अधिकारी की चुनौती ने इस मुकाबले को 'साख की लड़ाई' बना दिया है। मुख्यमंत्री का खुद बूथों पर जाकर बैठना और सुवेंदु का आक्रामक अंदाज यह संकेत दे रहा है कि इस सीट पर मुकाबला एक-एक वोट के लिए बेहद कड़ा है।
निष्कर्ष: 29 अप्रैल की यह तारीख बंगाल की राजनीति में 'दिग्गजों की भिड़ंत' के लिए याद रखी जाएगी। अब देखना यह है कि 4 मई को जब नतीजे आएंगे, तो भवानीपुर की जनता सुवेंदु के दावे पर मुहर लगाती है या ममता के भरोसे पर।





