नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में सुलग रही आंतरिक कलह राष्ट्रीय राजनीति का रुख बदलने जा रही है। ममता बनर्जी की अगुवाई वाली टीएमसी में जारी इस विद्रोह से केंद्र की एनडीए (NDA) सरकार को संसद में वह 'ब्रह्मास्त्र' मिल सकता है, जिसकी उसे लंबे समय से तलाश थी। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि इस बगावत के बूते सरकार आगामी मानसून सत्र में परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे बेहद अहम संविधान संशोधन विधेयकों को लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत से पास कराने की तैयारी में है।

जुलाई में फिर पेश हो सकता है परिसीमन बिल

संसद का मानसून सत्र जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होने जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस सत्र में एक बार फिर परिसीमन बिल पेश कर सकती है। गौरतलब है कि अप्रैल में जरूरी दो-तिहाई बहुमत न होने के कारण यह बिल संसद में गिर गया था। परिसीमन बिल या संविधान (131वां संशोधन) बिल 2026 के साथ ही महिला आरक्षण संविधान संशोधन बिल भी जुड़ा हुआ है, जो पिछली बार बहुमत के अभाव में अटक गए थे।

टीएमसी में बगावत: एनडीए के लिए 'लॉटरी'

लोकसभा में टीएमसी के कुल 29 सांसद हैं। अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में इनमें से करीब 20 सांसद एक अलग गुट बनाने और एनडीए सरकार को बाहर या भीतर से समर्थन देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यदि ऐसा होता है, तो संसद का गणित पूरी तरह बदल जाएगा।

क्या है लोकसभा का गणित? 543 सदस्यों वाली लोकसभा में संविधान संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 362 वोटों की आवश्यकता होती है। वर्तमान में तीन सीटें (बसीरहाट, शिलांग और नौगोंग) सांसदों के निधन के कारण रिक्त हैं, जिससे प्रभावी आंकड़ा घटकर 360 रह गया है।

समीकरणों का खेल: कैसे जुटेगा बहुमत?

वर्तमान में एनडीए के पास 293 सांसदों का मजबूत समर्थन है। सरकार इस आंकड़े को 360 के पार ले जाने के लिए कई मोर्चों पर काम कर रही है:

राजनैतिक दल / गुटसंभावित संख्याकुल बढ़ता आंकड़ा
वर्तमान एनडीए293
टीएमसी का बागी गुट (संभावित)+20313
डीएमके (DMK) का झुकाव+22335
उद्धव गुट (शिवसेना) के बागी+06341
अप्रैल वोटिंग के अतिरिक्त वोट+05346

डीएमके की नाराजगी का फायदा: तमिलनाडु में विजय की सरकार को कांग्रेस का समर्थन मिलने के बाद डीएमके नेतृत्व काफी नाराज चल रहा है। चर्चा है कि डीएमके कुछ विशेष मुद्दों पर एनडीए के पक्ष में मतदान कर सकती है।

उद्धव गुट में भी सेंध की तैयारी: भाजपा की नजर उद्धव ठाकरे गुट वाली शिवसेना के 9 सांसदों पर भी है, जिनमें से कम से कम 6 सांसद पाला बदल सकते हैं।

इस तरह एनडीए का आंकड़ा 348 तक पहुंच जाता है, जो जरूरी दो-तिहाई बहुमत (360) से केवल 12 वोट दूर है। सरकार को पूरा भरोसा है कि अन्य छोटी पार्टियों, निर्दलीय सांसदों और क्रॉस-वोटिंग के जरिए इस 12 वोटों की कमी को आसानी से पूरा कर लिया जाएगा।

क्यों आसान दिख रही है बिल की राह?

संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए सदन के कुल सदस्यों में से कम से कम आधे (50%) सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य होती है। इसके साथ ही, सदन में मौजूद और मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई (2/3) बहुमत मिलना जरूरी है।

पिछली बार जब अप्रैल में वोटिंग हुई थी, तब सदन में केवल 528 सांसद उपस्थित थे, जिससे दो-तिहाई का आंकड़ा घटकर 352 हो गया था। यदि इस बार भी मानसून सत्र में ऐसी ही स्थिति बनती है, तो फ्लोर मैनेजमेंट के जरिए सरकार के लिए बिल पास कराना बेहद आसान हो जाएगा।

राज्यसभा में भी राह आसान

निचले सदन के साथ-साथ उच्च सदन यानी राज्यसभा में भी एनडीए दो-तिहाई बहुमत के बेहद करीब है। राज्यसभा में इस ऐतिहासिक बहुमत के लिए 164 सीटों की जरूरत होती है, जबकि एनडीए पहले ही 150 का आंकड़ा पार कर चुका है। ऐसे में रणनीतिकारों का मानना है कि यदि लोकसभा में गतिरोध टूटता है, तो राज्यसभा में भी सरकार को कोई बड़ी चुनौती नहीं मिलेगी।