कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर लंबे समय से सुलग रही बगावत की चिंगारी अब एक राजनीतिक ज्वालामुखी में बदल चुकी है। पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने कड़ा रुख अपनाते हुए पार्टी-विरोधी गतिविधियों के आरोप में कोलकाता के पूर्व मेयर फिरहाद हकीम और कद्दावर नेता अरूप बिस्वास सहित आठ शीर्ष नेताओं को तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित कर दिया है।

विधानसभा चुनाव के बाद से ही पार्टी में जारी अंतर्कलह के बीच ममता बनर्जी का यह कदम बागी धड़े के लिए एक विनाशकारी प्रशासनिक प्रहार माना जा रहा है।

इन 8 बड़े चेहरों पर गिरी गाज

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने आज मंगलवार (23 जून) को पहले बागियों को कारण बताओ (शो-कॉज) नोटिस जारी किया और उसके कुछ ही घंटों बाद इन सभी को बाहर का रास्ता दिखा दिया। निष्कासित किए गए नेताओं की सूची में बंगाल की राजनीति के कई भारी-भरकम नाम शामिल हैं:

फिरहाद हकीम (पूर्व सहयोगी और पूर्व मेयर, कोलकाता)

अरूप बिस्वास (पूर्व मंत्री)

अरूप रॉय (वरिष्ठ विधायक)

जावेद अहमद खान

रथिन घोष

बिप्लब मित्रा

सबीना यास्मीन

स्नेहाशीष चक्रवर्ती

तख्तापलट की कोशिश के बाद भड़का 'दीदी' का गुस्सा

दरअसल, यह अभूतपूर्व कार्रवाई उस वक्त हुई जब सोमवार को ऋतब्रत बनर्जी (विधानसभा में विपक्ष के नेता) के नेतृत्व वाले बागी गुट ने एक दुस्साहसिक कदम उठाते हुए ममता बनर्जी को ही तृणमूल के चेयरपर्सन पद से हटा दिया था। 1998 में कांग्रेस से अलग होकर TMC का गठन करने वाली ममता बनर्जी के राजनीतिक इतिहास में यह पहली बार था जब उनकी कुर्सी पर चुनौती दी गई।

बागी गुट ने ममता बनर्जी को 'मार्गदर्शक' (मेंटर) की भूमिका में धकेलते हुए वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को पार्टी का नया चेयरपर्सन और फिरहाद हकीम व अरूप बिस्वास को वाइस-चेयरपर्सन घोषित कर दिया था। इसके जवाब में ममता बनर्जी ने 24 घंटे के भीतर पूरी बिसात पलट दी।

"पार्टी अनुशासन से ऊपर कोई नहीं है। जानबूझकर पार्टी-विरोधी गतिविधियों में शामिल होने और समानांतर ढांचा खड़ा करने की कोशिश करने वालों को संगठन में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।" — ममता बनर्जी गुट की ओर से जारी आधिकारिक रुख

इधर सियासी घमासान, उधर TMC नेता के घर छापेमारी में 3 किलो सोना बरामद

इस राजनीतिक भूचाल के बीच बंगाल से एक और सनसनीखेज खबर आई है। पूर्व विधायक सब्यसाची दत्ता से जुड़े एक जबरन वसूली (वसूली) मामले की जांच के सिलसिले में पुलिस ने नदिया जिले के करीमपुर में बड़ी कार्रवाई की है।

पुलिस ने टीएमसी जिला परिषद की सदस्य टीना भौमिक साहा के पैतृक आवास पर छापामारी की, जहाँ से करीब 3 किलोग्राम सोने के आभूषण बरामद किए गए हैं। बरामद किए गए इस सोने का मौजूदा बाजार मूल्य लगभग 4 करोड़ 39 लाख रुपये आंका गया है। इस रिकवरी ने तृणमूल कांग्रेस की आंतरिक कलह के बीच भ्रष्टाचार के मुद्दे पर विपक्ष को एक और बड़ा हथियार दे दिया है।

संपादकीय दृष्टिकोण: ममता बनर्जी द्वारा अपने सबसे भरोसेमंद रहे साथियों को बाहर निकालना यह साफ करता है कि वह संगठन पर अपनी पकड़ ढीली नहीं होने देंगी। हालांकि, इस विभाजन के बाद बंगाल की राजनीति किस करवट बैठेगी और क्या यह बागी गुट कोई नई पार्टी बनाएगा, इस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हैं।