नई दिल्ली | एजुकेशन डेस्क नेशनल एंट्रेंस कम एलिजिबिलिटी टेस्ट (NEET UG 2026) का पेपर लीक होने की पुष्टि के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया है। राजस्थान के सीकर से शुरू हुए इस विवाद ने अब देशव्यापी आंदोलन का रूप ले लिया है। विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर सरकार की घेराबंदी तेज कर दी है।

राहुल गांधी का 'एक्स' (Twitter) पर तीखा हमला

राहुल गांधी ने इस घटना को युवाओं के भविष्य के खिलाफ एक 'संगठित अपराध' करार दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा की भ्रष्ट व्यवस्था ने 22 लाख से अधिक छात्रों की मेहनत और उनके माता-पिता के त्याग को कुचल दिया है।

भावुक अपील: राहुल गांधी ने लिखा, "किसी पिता ने कर्ज लिया, किसी मां ने गहने बेचे... और बदले में उन्हें क्या मिला? पेपर लीक और सरकारी लापरवाही।"

विषकाल का तंज: प्रधानमंत्री के 'अमृतकाल' पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि यह दौर देश के युवाओं के लिए 'विषकाल' बन चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर भाग्य परिश्रम से नहीं बल्कि पैसे और पहुंच से तय होगा, तो शिक्षा का क्या अर्थ रह जाएगा?

SOG और CBI की जांच: क्या है पूरा मामला?

120 सवालों का मेल: राजस्थान की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) हालांकि इसे तकनीकी रूप से 'पेपर लीक' कहने से बच रही है, लेकिन उसने स्वीकार किया है कि एक वायरल 'गेस पेपर' के 120 सवाल मुख्य परीक्षा से हूबहू मिलते थे।

CBI को कमान: मामले की गंभीरता और देश भर में बढ़ते आक्रोश को देखते हुए केंद्र सरकार ने इसकी जांच का जिम्मा अब CBI को सौंप दिया है।

परीक्षार्थियों के लिए राहत की खबरें

भविष्य की अनिश्चितता के बीच NTA ने कुछ महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं:

दोबारा परीक्षा: नीट यूजी 2026 का एग्जाम जल्द ही फिर से आयोजित किया जाएगा। उम्मीद है कि नई परीक्षा जून 2026 में ही कराई जाएगी।

फीस वापसी: NTA ने स्पष्ट किया है कि छात्रों और उनके अभिभावकों को रजिस्ट्रेशन फीस वापस की जाएगी, ताकि उन पर आर्थिक बोझ कम हो सके।

निष्कर्ष

NEET जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में सेंधमारी ने देश की शिक्षा प्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहाँ लाखों छात्र अब दोबारा परीक्षा के तनाव से गुजरने को मजबूर हैं, वहीं राजनीतिक गलियारों में 'पेपर माफिया' और 'भ्रष्ट तंत्र' को लेकर बहस तेज हो गई है। अब सबकी नजरें CBI की जांच और दोबारा होने वाली परीक्षा की नई तारीखों पर टिकी हैं।

टिप्पणी: परीक्षा रद्द होना छात्रों के लिए केवल समय की बर्बादी नहीं, बल्कि एक गहरा मानसिक आघात भी है। उम्मीद है कि दोबारा होने वाली परीक्षा में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होंगे ताकि योग्य छात्रों के साथ न्याय हो सके।