मुंबई।

महाराष्ट्र की राजनीति में 'राम मंदिर' और 'हिंदू धर्म' के मुद्दे पर एक बार फिर बयानों के तीखे तीर चलने शुरू हो गए हैं। शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे द्वारा घोषित ‘राम रक्षा’ आंदोलन पर महाराष्ट्र सरकार के मत्स्य एवं बंदरगाह विकास मंत्री और बीजेपी नेता नितेश राणे ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। विधानसभा परिसर में मीडिया से बात करते हुए राणे ने उद्धव ठाकरे और सांसद संजय राउत पर सीधा हमला बोला और उद्धव ठाकरे की तुलना पाकिस्तान के एजेंट से करते हुए उन्हें ‘उद्धव उल हक’ तक कह डाला।

"राम मंदिर आंदोलन में ठाकरे का कोई योगदान नहीं"

कैबिनेट मंत्री नितेश राणे ने उद्धव ठाकरे की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन्हें आज भगवान राम और राम मंदिर की याद आ रही है, उनका इस ऐतिहासिक आंदोलन या मंदिर निर्माण में दूर-दूर तक कोई योगदान नहीं रहा है।

पाकिस्तान से तुलना: राणे ने आरोप लगाया कि जिस तरह पाकिस्तान भारत और हिंदुओं के खिलाफ द्वेष फैलाता है, ठीक वैसी ही भाषा आज उद्धव ठाकरे बोल रहे हैं।

हृदय परिवर्तन का आरोप: उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उद्धव ठाकरे का पूरी तरह से ‘राजनीतिक रूपांतरण’ हो चुका है और वे पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं को खुश करने के लिए राम मंदिर और हिंदू राष्ट्र की छवि को धूमिल कर रहे हैं।

शुद्धिकरण की मांग: राणे ने यहाँ तक कह दिया कि उद्धव ठाकरे अब जिस भी मंदिर में जाएं, उस परिसर का गौमूत्र से शुद्धिकरण किया जाना चाहिए, ताकि मंदिरों की पवित्रता बनी रहे।

क्यों शुरू हुआ यह विवाद? जानिए मुख्य वजह

दरअसल, यह पूरा सियासी घमासान उद्धव ठाकरे के उस बयान के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने अयोध्या के राम मंदिर में दान पेटियों और चंदे की धनराशि के कथित दुरुपयोग का मुद्दा उठाते हुए बीजेपी को घेरा था।

ठाकरे का ‘राम रक्षा’ आंदोलन: इस कथित वित्तीय गड़बड़ी के विरोध में उद्धव ठाकरे ने आने वाले रविवार को मुंबई के दादर स्थित हनुमान मंदिर के पास एक भव्य ‘राम रक्षा’ आंदोलन आयोजित करने की घोषणा की है। इसी घोषणा को बीजेपी ने आड़े हाथों लिया है।

"कोरोना काल में बंद किए हिंदू त्योहार, अब कर रहे पाखंड"

नितेश राणे ने उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री कार्यकाल की याद दिलाते हुए उन पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा:

अजान प्रतियोगिता पर घेरा: "मुस्लिम लीग के नक्शेकदम पर चलते हुए UBT गुट अब राम मंदिर पर राजनीति कर रहा है। यह वही ‘उद्धव उल हक’ हैं, जिन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए मुंबई में अजान प्रतियोगिताएं आयोजित करवाई थीं और आज मंदिरों में महाआरती का पाखंड कर रहे हैं।"

कोविड काल के फैसलों पर सवाल: राणे ने आरोप लगाया कि कोरोना काल के दौरान उद्धव सरकार ने हिंदू त्योहारों और मंदिरों पर तो पाबंदी लगा दी, लेकिन मस्जिदों या ईद के आयोजनों पर ऐसे कड़े नियम लागू करने का साहस कभी नहीं दिखाया।

"ईश्वर के नाम पर जिहाद"

अपने बयान के समापन पर नितेश राणे ने उद्धव ठाकरे के इस आंदोलन को 'ईश्वर के नाम पर किया जा रहा जिहाद' करार दिया। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज ने इतिहास में ऐसे कई हमलों को नाकाम किया है और ऐसे पाखंडी नेताओं को हमारे पवित्र मंदिरों को अपवित्र करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। इस तीखे पलटवार के बाद महाराष्ट्र की सियासत में आगामी रविवार को होने वाले आंदोलन को लेकर तनाव और बढ़ने के आसार हैं।