नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद ने 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' (ONOE) की पहल का पुरजोर समर्थन किया है। सोमवार को इस विषय की समीक्षा कर रही संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के साथ बातचीत के दौरान आजाद ने इसे भारत के लिए एक 'विन-विन' (Win-Win) स्थिति करार दिया।
विकास की गति को मिलेगा बल
आजाद ने समिति के सामने तर्क दिया कि बार-बार होने वाले चुनावों के कारण प्रशासनिक समय और राजनीतिक ध्यान का एक बड़ा हिस्सा चुनाव प्रचार में बर्बाद हो जाता है।
शासन पर ध्यान: उन्होंने कहा कि एक साथ चुनाव होने से सरकारों और राजनीतिक नेतृत्व को निरंतर प्रचार के बजाय शासन और विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलेगा।
इतिहास का हवाला: उन्होंने याद दिलाया कि आजादी के शुरुआती दशकों में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ ही होते थे, लेकिन बाद में समय से पहले विधानसभाओं के भंग होने के कारण यह चक्र टूट गया।
विपक्ष और क्षेत्रीय दलों के लिए फायदेमंद
आजाद ने एक दिलचस्प पहलू यह भी रखा कि यह सुधार केवल सत्ता पक्ष के लिए ही नहीं, बल्कि विपक्ष के लिए भी लाभकारी है।
क्षेत्रीय नेतृत्व का सशक्तिकरण: उनके अनुसार, यह व्यवस्था विपक्षी दलों को राष्ट्रीय नेताओं या केंद्रीय मंत्रियों के बजाय अपने मजबूत क्षेत्रीय नेतृत्व पर भरोसा करने के लिए प्रोत्साहित करेगी।
दलबदल पर रोक: आजाद ने सुझाव दिया कि एक साथ चुनाव होने से निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा किए जाने वाले दलबदल पर लगाम लगेगी, जिससे राजनीतिक स्थिरता बढ़ेगी।
प्रशासनिक और वित्तीय राहत
समिति को संबोधित करते हुए आजाद ने ONOE को एक 'मास्टरस्ट्रोक' बताया और इसके तीन प्रमुख लाभ गिनाए:
खर्च में कमी: चुनावों पर होने वाले भारी खर्च में उल्लेखनीय कमी आएगी।
वोटर थकान: बार-बार मतदान करने से होने वाली 'वोटर थकान' (Voter Fatigue) दूर होगी।
सुरक्षा बलों को राहत: चुनाव प्रबंधन कर्मियों और सुरक्षा बलों पर पड़ने वाला अतिरिक्त बोझ कम होगा।
निष्कर्ष: संघीय ढांचे को कोई खतरा नहीं
आजाद ने स्पष्ट किया कि एक साथ चुनाव कराने से देश के लोकतांत्रिक चरित्र या संघीय ढांचे को कोई नुकसान नहीं होगा। उनके अनुसार, इसे लागू करने की चुनौतियां इसके फायदों के सामने बहुत छोटी हैं।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लंबे समय से 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' की वकालत कर रहे हैं, ताकि चुनावी चक्र को व्यवस्थित कर देश की प्रशासनिक दक्षता को सुधारा जा सके।
मुख्य बिंदु:
समर्थन: गुलाम नबी आजाद ने JPC के सामने ONOE को 'मास्टरस्ट्रोक' कहा।
तर्क: विकास कार्यों में निरंतरता और दलबदल पर अंकुश लगेगा।
लाभ: चुनावी खर्च और प्रशासनिक बोझ में बड़ी कमी आएगी।





