नई दिल्ली/पटना: दिल्ली के द्वारका इलाके में बिहार के एक युवक की नृशंस हत्या ने राजनीतिक गलियारों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। केंद्रीय मंत्री और लोजपा (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने दूसरे राज्यों में बिहारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बिहार में एक समर्पित 'प्रवासी बिहारी मंत्रालय' के गठन का प्रस्ताव रखा है।
'बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट' के तहत नए मंत्रालय का विजन
चिराग पासवान ने कहा कि यह मंत्रालय उनकी पार्टी के 'बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट' विजन का एक अनिवार्य हिस्सा है।
डेटा प्रबंधन: इस मंत्रालय के माध्यम से राज्य सरकार देश और विदेशों में रह रहे बिहारियों का एक व्यापक डेटाबेस तैयार कर सकेगी।
सुरक्षा और गरिमा: चिराग ने जोर देकर कहा, "जाति और धर्म से ऊपर उठकर बिहारियों की खोई हुई प्रतिष्ठा को वापस लाना हमारा संकल्प है। अन्य राज्यों में बिहारियों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है।" उन्होंने इस व्यवस्था को लागू करने के लिए राज्य सरकार और मुख्यमंत्री से आग्रह करने की बात भी कही।
क्या है वारदात? पुलिसकर्मी पर हत्या का आरोप
यह घटना 26 अप्रैल की रात दिल्ली के जाफरपुर कलां गांव में हुई। बिहार के खगड़िया का रहने वाला पांडव कुमार अपने दोस्त कृष्ण के साथ एक जन्मदिन की पार्टी में गया था।
नस्लीय टिप्पणी और हिंसा: आरोप है कि दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल में तैनात हेड कांस्टेबल नीरज ने शराब के नशे में उनसे बहस की। जैसे ही उसे पता चला कि युवक बिहार से हैं, उसने जातिसूचक गालियां दीं और पांडव के सीने में गोली मार दी।
एक की मौत, दूसरा घायल: पांडव की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसका दोस्त कृष्ण अस्पताल में गंभीर स्थिति में है। आरोपी पुलिसकर्मी फिलहाल फरार है।
जीतन राम मांझी का विवादित बयान: "मार दिया तो मार दिया..."
जहाँ एक ओर इस घटना से शोक और रोष व्याप्त है, वहीं केंद्रीय मंत्री और 'हम' (HAM) प्रमुख जीतन राम मांझी ने एक संवेदनहीन बयान देकर विवाद खड़ा कर दिया है। मांझी ने पत्रकारों से कहा:
"इसमें कौन सी बड़ी बात है, मार दिया तो मार दिया। कोई जानबूझकर किसी को नहीं मार देता। आप को क्यों नहीं किसी ने मारा? किसी पर शंका होगी, जांच होगी और सजा मिलेगी।" मांझी के इस 'अजीबोगरीब' तर्क की विपक्षी दलों ने कड़ी आलोचना की है।
सियासी वार-पलटवार: तेजस्वी बनाम चिराग
इस मुद्दे पर तेजस्वी यादव ने एनडीए सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया, जिस पर चिराग पासवान ने पलटवार करते हुए उन्हें 1990 के दशक के 'जंगलराज' की याद दिलाई। चिराग ने कहा कि आरजेडी के शासनकाल में कानून-व्यवस्था की जो स्थिति थी, उसी की वजह से बिहार आज भी पिछड़ा हुआ है।
आगे की रणनीति
चिराग पासवान ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार से मिलने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेगा। उन्होंने मांग की है कि दोषी पुलिसकर्मी के खिलाफ ऐसी कार्रवाई हो जो नजीर बने, ताकि भविष्य में किसी भी बिहारी के साथ उसकी पहचान के आधार पर भेदभाव या हिंसा न हो।
निष्कर्ष: दिल्ली में हुई यह घटना एक बार फिर प्रवासियों की सुरक्षा और क्षेत्रीय पहचान के आधार पर होने वाले भेदभाव की ओर इशारा करती है। चिराग पासवान द्वारा प्रस्तावित 'प्रवासी बिहारी मंत्रालय' इस दिशा में एक बड़ा नीतिगत बदलाव साबित हो सकता है।





