नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा आने वाले मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेंगे। राष्ट्रपति भवन ने चड्ढा को 5 मई की सुबह 10:40 बजे का समय दिया है। इस मुलाकात के केंद्र में पंजाब की वर्तमान राजनीतिक स्थिति और वहां के सरकारी तंत्र के कथित दुरुपयोग का गंभीर मुद्दा रहने वाला है।

मुलाकात का मुख्य एजेंडा: 'राजनीतिक प्रतिशोध' की शिकायत

सूत्रों के अनुसार, राघव चड्ढा राष्ट्रपति के समक्ष पंजाब सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी चिंताएं साझा करेंगे। उनके मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं:

सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग: चड्ढा का दावा है कि पंजाब के सरकारी तंत्र का इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को दबाने के लिए किया जा रहा है।

दलबदलुओं पर निशाना: आरोप है कि उन सांसदों और नेताओं को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है, जिन्होंने हाल ही में आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थामा है।

चड्ढा के साथ तीन अन्य सांसद भी इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा होंगे, जो राष्ट्रपति को विस्तृत जानकारी देंगे।

पार्टी से बढ़ती दूरियां या रणनीतिक चुप्पी?

पिछले कुछ समय से राघव चड्ढा और 'आप' नेतृत्व के बीच सब कुछ ठीक न होने की खबरें सुर्खियां बटोर रही हैं। राजनीतिक गलियारों में इस 'खटास' के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं:

जेल बनाम लंदन की सैर: जब अरविंद केजरीवाल जेल में थे, तब राघव चड्ढा अपनी पत्नी परिणीति चोपड़ा के साथ लंदन में थे। सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरों ने कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष पैदा किया था।

चुनावों से दूरी: लोकसभा चुनावों के दौरान पंजाब के प्रभारी होने के बावजूद उन्हें मुख्यधारा के प्रचार से दूर रखा गया।

खामोशी और बगावती तेवर: राज्यसभा में उपनेता के पद से हटाए जाने और अन्य संगठनात्मक बदलावों पर विपक्ष इसे अंदरूनी कलह बता रहा है।

चड्ढा का शायराना जवाब: हाल ही में चड्ढा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर इशारों में कहा, "मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना, मैं वो दरिया हूं जो वक्त आने पर सैलाब बनता है।"

राघव चड्ढा: एक नजर में

सबसे युवा सांसद: चड्ढा पंजाब से राज्यसभा के सबसे युवा सदस्य हैं।

सफर: 2015 में 'आप' के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बने, 2020 में दिल्ली के राजेंद्र नगर से विधायक चुने गए और बाद में पंजाब के सह-प्रभारी के रूप में पार्टी की बड़ी जीत में भूमिका निभाई।

विवाद: हाल के दिनों में पार्टी के अहम मुद्दों पर उनकी चुप्पी ने कई सवाल खड़े किए हैं, जिसे पार्टी नेता संजय सिंह ने महज एक 'सामान्य संगठनात्मक प्रक्रिया' बताया है।

अब सबकी नजरें मंगलवार की सुबह होने वाली इस उच्चस्तरीय मुलाकात पर टिकी हैं, जो पंजाब की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकती है।