नई दिल्ली/रांची: पश्चिम एशिया में ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव ने जहाँ दुनिया भर में ऊर्जा संकट की चिंता बढ़ा दी है, वहीं भारत की आंतरिक राजनीति में एक दुर्लभ और सकारात्मक मोड़ देखने को मिला है। भाजपा सांसद और केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर की जमकर सराहना की है। सेठ ने थरूर के हालिया रुख को "सच्ची देशभक्ति" का परिचायक बताते हुए राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य बड़े नेताओं को उनसे सीखने की सलाह दी है।
"विरोध के लिए विरोध ठीक नहीं"
संजय सेठ ने मीडिया से बातचीत में कहा कि राष्ट्रहित के मुद्दों पर राजनीति से ऊपर उठकर बात होनी चाहिए। उन्होंने कहा:
"शशि थरूर निश्चित रूप से कांग्रेस के सांसद हैं, लेकिन जब भी देश की साख या सुरक्षा की बात आती है, वे हमेशा भारत के साथ खड़े नजर आते हैं। वे एक जिम्मेदार नागरिक और सच्चे देशभक्त हैं। राहुल गांधी को थरूर जी से सीखना चाहिए कि कूटनीति और राजनीति में क्या अंतर होता है।"
प्रधानमंत्री की कूटनीति पर जताया भरोसा
ईरान-इजराइल संघर्ष के कारण गैस और ईंधन संकट की आशंकाओं को खारिज करते हुए सेठ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि पीएम की दूरदर्शी कूटनीति के कारण ही आज देश में अमन-चैन है और डीजल, पेट्रोल या गैस की कोई कमी नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल (कांग्रेस) अनावश्यक रूप से घबराहट पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।
थरूर के लेख ने बदली हवा
इस पूरी प्रशंसा के केंद्र में शशि थरूर का वह लेख है, जिसमें उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की वर्तमान 'चुप्पी' और संतुलित रुख का बचाव किया है। विदेश मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष थरूर ने अपने लेख में निम्नलिखित प्रमुख बिंदु रखे:
जिम्मेदार कूटनीति: भारत की चुप्पी कोई 'नैतिक आत्मसमर्पण' नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार कूटनीति है।
नेहरू की नीति का हवाला: उन्होंने जवाहरलाल नेहरू की 'गुटनिरपेक्षता' (Non-Alignment) की याद दिलाते हुए कहा कि भारत आज 'मल्टी-अलाइनमेंट' का अभ्यास कर रहा है।
दिखावा नहीं, विवेक जरूरी: थरूर के अनुसार, ईरान पर युद्ध भले ही अंतरराष्ट्रीय कानूनन सही न हो, लेकिन भारत की चुप्पी का अर्थ युद्ध का समर्थन करना नहीं, बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है।
कांग्रेस पर कड़ा प्रहार
संजय सेठ ने थरूर की तारीफ के बहाने कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष हर मुद्दे पर भारत की छवि खराब करने की कोशिश करता है। उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर', भारतीय अर्थव्यवस्था और सर्जिकल स्ट्राइक जैसे उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस हर गौरवशाली कदम पर सवाल उठाती रही है, जबकि थरूर जैसे नेता राष्ट्रनीति को समझते हैं।
निष्कर्ष: पश्चिम एशिया का युद्ध भले ही सीमाओं पर लड़ा जा रहा हो, लेकिन भारत में इसने कूटनीति और राष्ट्रवाद की एक नई बहस को जन्म दे दिया है। थरूर का संतुलित रुख और भाजपा की ओर से मिली यह सराहना भारतीय राजनीति में एक सुखद अपवाद की तरह देखी जा रही है।





