कोलकाता:

विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर सुलग रहा असंतोष अब एक बड़े राजनीतिक विस्फोट में बदल गया है। बुधवार को पार्टी के भीतर की अंदरूनी कलह उस समय सड़कों और गलियारों से निकलकर विधानसभा पहुंच गई, जब टीएमसी के करीब 60 विधायकों ने एक साथ विधानसभा का रुख किया। सूत्रों के मुताबिक, ये बागी विधायक पार्टी आलाकमान को चुनौती देते हुए संगठन के भीतर एक नया और अलग 'शक्ति केंद्र' स्थापित करने की पुरजोर कोशिश में जुट गए हैं।

'असली तृणमूल' के दावे के साथ स्पीकर को प्रस्ताव की तैयारी

सियासी गलियारों से छनकर आ रही खबरों के अनुसार, बगावत का झंडा बुलंद करने वाले ये विधायक खुद को ही 'वास्तविक तृणमूल' घोषित करने की रणनीति बना रहे हैं। इस सिलसिले में ये विधायक जल्द ही विधानसभा स्पीकर (अध्यक्ष) को एक औपचारिक प्रस्ताव सौंप सकते हैं। इस प्रस्ताव के जरिए सदन में विरोधी दल के नेता और मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर नए चेहरों की नियुक्ति की मांग की जा सकती है, जिससे टीएमसी में दो फाड़ होना तय माना जा रहा है।

हमारे पास दो-तिहाई बहुमत:

"हमारे इस गुट को दो-तिहाई से अधिक विधायकों का पूरा समर्थन हासिल है। दल-बदल कानून से बचने के लिए जरूरी 52 विधायकों के मुकाबले हमारे साथ कहीं बड़ी संख्या है।"

ऋतब्रत बंद्योपाध्याय (सूत्रों के अनुसार संभावित चेहरा)

कैसे शुरू हुआ विवाद: जाली हस्ताक्षर और निष्कासन का घटनाक्रम

इस अभूतपूर्व आंतरिक संकट की पटकथा कुछ समय पहले ही लिखी जा चुकी थी, जिसकी कड़ियाँ मुख्य रूप से निम्नलिखित घटनाक्रमों से जुड़ी हैं:

जाली हस्ताक्षर का आरोप: विवाद की चिंगारी तब भड़की जब ऋतब्रत बंद्योपाध्याय और संदीपन साहा ने शिकायत दर्ज कराई कि विपक्ष के नेता के समर्थन से जुड़े एक प्रस्ताव पर कुछ विधायकों के हस्ताक्षर पूरी तरह जाली हैं।

ममता बनर्जी का कड़ा रुख: इस शिकायत के बाद विधानसभा सचिवालय की पहल पर मामला दर्ज हुआ, जिसकी जांच फिलहाल सीआईडी (CID) कर रही है। हालांकि, पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने इस पूरे मामले में दोनों ही विधायकों (ऋतब्रत और संदीपन) की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए।

पार्टी से निष्कासन: जैसे ही ममता बनर्जी द्वारा दोनों के नाम सार्वजनिक किए गए, उसके तुरंत बाद तृणमूल कांग्रेस ने कड़ा एक्शन लेते हुए ऋतब्रत बंद्योपाध्याय और संदीपन साहा को 'पार्टी विरोधी गतिविधियों' के आरोप में दल से निष्कासित कर दिया।

आगे क्या? बैठकों का दौर जारी

पार्टी से निकाले जाने के बाद अब ऋतब्रत बंद्योपाध्याय इस असंतुष्ट गुट के मुख्य चेहरे के रूप में उभर रहे हैं। वर्तमान में बागी विधायकों की एक महत्वपूर्ण बैठक शुरू हो चुकी है, जिसमें आगे की रणनीति तय की जा रही है।

चुनावी हार के सदमे से उबरने की कोशिश कर रही ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के लिए अपने ही विधायकों का यह विद्रोह अब तक का सबसे बड़ा संकट बन चुका है। अब देखना यह होगा कि पार्टी आलाकमान इस डैमेज को कंट्रोल करने के लिए क्या कदम उठाता है।