नई दिल्ली:
पूर्व राष्ट्रपति दिवंगत प्रणब मुखर्जी की बेटी और पूर्व कांग्रेस नेता शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व और राहुल गांधी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। समाचार एजेंसी 'आईएएनएस' (IANS) से बातचीत के दौरान उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि कांग्रेस आलाकमान में वर्तमान समय में अपने दम पर सरकार बनाने का वह जरूरी जोश और जज्बा दिखाई नहीं देता है। उन्होंने पार्टी को नसीहत दी कि कांग्रेस को केवल गठबंधनों के भरोसे रहने के बजाय जमीनी स्तर पर खुद का मजबूत संगठन खड़ा करना चाहिए।
"दो दिन दिखे और फिर गायब हो गए, ऐसे नहीं होती राजनीति"
वर्ष 2029 के आगामी आम चुनावों और राहुल गांधी की भूमिका को लेकर पूछे गए सवाल पर शर्मिष्ठा मुखर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने 'भारत जोड़ो यात्रा' के सकारात्मक परिणामों और 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को मिली 99 सीटों का जिक्र करते हुए कहा:
"दुर्भाग्य यह है कि राहुल गांधी कुछ कार्यक्रम तो करते हैं, मगर उसके बाद वह फिर से गायब हो जाते हैं। राजनीति 24 घंटे और 365 दिनों का काम है। आप आएं, दो दिन बाद फिर कहीं चले जाएं, कुछ रैलियां करें, लोगों से मिलें और फिर ओझल हो जाएं—इस तरह से देश में राजनीति नहीं की जा सकती। आम चुनावों के अलावा राज्यों के विधानसभा चुनाव भी होते हैं, आप सिर्फ गठबंधन के सहारे हर जगह नहीं जीत सकते।"
"दूसरों के कंधे पर बंदूक रखकर चलाने की रणनीति सही नहीं"
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कांग्रेस में अपने काम करने के दिनों के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि आज कांग्रेस की सोच सिर्फ दूसरों के साथ मिलकर किसी तरह सरकार बनाने तक सीमित हो गई है। उन्होंने पार्टी की इस मानसिकता की आलोचना करते हुए कहा:
कांग्रेस को अपने दम पर चुनावी मैदान में उतरना चाहिए और संगठन की अपनी एक स्वतंत्र रणनीति होनी चाहिए।
"दूसरों की बदौलत या किसी और के कंधे पर बंदूक रखकर चलाने वाली रणनीति" लंबे समय तक कारगर नहीं हो सकती।
जब तक कांग्रेस आलाकमान खुद के बलबूते सत्ता में आने का साहस नहीं दिखाएगा, तब तक संगठन में जान फूंकना नामुमकिन है।
पीएम मोदी और राहुल गांधी की तुलना को बताया गलत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी के बीच तुलना के सवाल पर शर्मिष्ठा ने साफ कहा कि इन दोनों नेताओं के बीच किसी भी प्रकार की तुलना करना पूरी तरह से गलत होगा।
इसकी वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि राहुल गांधी साल 2014 से लगातार कांग्रेस का मुख्य चेहरा बने हुए हैं, लेकिन उनके नेतृत्व में कुछ गिने-चुने राज्यों को छोड़ दिया जाए, तो पार्टी लगातार चुनाव हारती आई है। इसके विपरीत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बेहद लोकप्रिय नेता हैं और उनकी यह देशव्यापी लोकप्रियता उन्हें मिलने वाले भारी जनादेश से साफ साबित होती है। शर्मिष्ठा ने बेबाकी से कहा कि राहुल गांधी वह जनादेश अपने और अपनी पार्टी के लिए हासिल नहीं कर पा रहे हैं, जो उनकी एक बहुत बड़ी सांगठनिक असफलता को दर्शाता है।





