नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम। केरल विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत हासिल करने के बाद अब 'संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे' (UDF) की सरकार के नेतृत्व को लेकर सस्पेंस खत्म होने वाला है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पुष्टि की है कि मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर सभी आंतरिक चर्चाएं पूरी हो चुकी हैं। कल यानी गुरुवार को कांग्रेस हाईकमान आधिकारिक तौर पर नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा कर देगा।
कांग्रेस की 'सोशल इंजीनियरिंग' और हाईकमान का फैसला
जयराम रमेश ने बताया कि केरल कांग्रेस विधायक दल (CLP) की राय जानने के बाद पार्टी नेतृत्व ने गहन विचार-विमर्श किया है।
लोकतांत्रिक प्रक्रिया: राहुल गांधी ने स्वयं राज्य के आठ पूर्व अध्यक्षों से 'वन-टू-वन' बात की है।
वरिष्ठों की राय: वीएम सुधीरण, एमएम हसन और के सुधाकरण जैसे दिग्गजों से दिल्ली में मुलाकात हुई, जबकि मुल्लापल्ली रामचंद्रन से फोन पर सलाह ली गई।
लक्ष्य: पार्टी ऐसा चेहरा चाहती है जो न केवल संगठन को एकजुट रखे, बल्कि जनता की भावनाओं के अनुरूप भी हो।
रेस में ये तीन 'शहंशाह' सबसे आगे
केरल की सत्ता की चाबी किसके हाथ होगी, इसके लिए तीन मुख्य दावेदारों के नाम चर्चा में हैं:
रमेश चेन्निथला: अनुभवी नेता और प्रशासन पर मजबूत पकड़।
वीडी सतीशन: विपक्ष के नेता के रूप में अपनी धारदार छवि और युवाओं में लोकप्रियता के लिए जाने जाते हैं।
केसी वेणुगोपाल: एआईसीसी महासचिव और संगठन में मजबूत कद, जिन्हें हाईकमान का बेहद करीबी माना जाता है।
चुनावी जनादेश: UDF की ऐतिहासिक वापसी
केरल की 140 सदस्यीय विधानसभा में इस बार जनता ने यूडीएफ को स्पष्ट और दो-तिहाई बहुमत दिया है।
कुल सीटें (UDF): 102
कांग्रेस: 63 सीटें
मुस्लिम लीग: 22 सीटें
केरल कांग्रेस: 08 सीटें
आरएसपी: 03 सीटें
4 मई को आए नतीजों के बाद से ही मुख्यमंत्री पद के लिए रस्साकशी जारी थी, जो अब बुधवार शाम तक चली मैराथन बैठकों के बाद अंतिम निर्णय पर पहुँच गई है।
चुनौती: असंतोष को थामना
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व इस बात को लेकर विशेष सतर्क है कि मुख्यमंत्री के चयन से गुटबाजी न बढ़े। वरिष्ठ नेता वीएम सुधीरन ने भी संकेत दिया है कि फैसला "जनता की आवाज" होना चाहिए। पार्टी का प्रयास है कि शपथ ग्रहण से पहले सभी सहयोगियों और आंतरिक गुटों को साध लिया जाए ताकि सरकार की शुरुआत एक मजबूत और एकजुट संदेश के साथ हो।
निष्कर्ष:
कल सुबह जब कांग्रेस मुख्यालय से नाम की घोषणा होगी, तो यह न केवल केरल के अगले पांच साल की दिशा तय करेगा, बल्कि दक्षिण भारत में कांग्रेस के बढ़ते प्रभाव का नया चेहरा भी उजागर करेगा।





