नई दिल्ली। नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर देश भर में जारी आक्रोश के बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक भावुक और हमलावर पोस्ट साझा करते हुए राहुल गांधी ने पिछले 11 वर्षों के आंकड़ों का हवाला देते हुए परीक्षा प्रणाली को 'भ्रष्ट तंत्र' करार दिया। उन्होंने साफ कहा कि यह छात्रों की आत्महत्या नहीं, बल्कि सिस्टम द्वारा की गई हत्या है।
आंकड़ों के जरिए सिस्टम को घेरा: 148 घोटाले, सजा सिर्फ एक को
राहुल गांधी ने वर्ष 2015 से 2026 तक के चौंकाने वाले आंकड़े पेश करते हुए सरकार की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े किए:
घोटालों की झड़ी: पिछले 11 वर्षों में कुल 148 परीक्षा घोटाले सामने आए।
रद्द परीक्षाएं: धांधली के कारण 87 परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं।
प्रभावित छात्र: इन घोटालों और रद्द परीक्षाओं की वजह से लगभग 9 करोड़ बच्चों का भविष्य प्रभावित हुआ है।
जांच का नतीजा: राहुल ने आरोप लगाया कि 148 घोटालों में से सजा सिर्फ एक व्यक्ति को हुई है। उन्होंने बताया कि सीबीआई ने 17 और ईडी ने 11 मामले हाथ में लिए, लेकिन ठोस परिणाम शून्य रहे।
"कितने ऋतिक चाहिए आपकी जवाबदेही जगाने के लिए?"
राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में लखीमपुर खीरी के 21 वर्षीय छात्र ऋतिक मिश्रा और गोवा के एक अभ्यर्थी का जिक्र किया, जिन्होंने पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के बाद अपनी जान दे दी।
भावुक उल्लेख: ऋतिक के आखिरी शब्दों— "अब नहीं देनी प्रतियोगी परीक्षा" —का हवाला देते हुए राहुल ने कहा कि ये बच्चे परीक्षा से नहीं हारे, बल्कि सिस्टम की भ्रष्ट नीतियों ने उनकी हिम्मत तोड़ दी।
इस्तीफे पर सवाल: उन्होंने तीखा सवाल किया कि आखिर किसी मंत्री या जिम्मेदार अधिकारी ने अब तक इस्तीफा क्यों नहीं दिया? उन्होंने आरोप लगाया कि गलती करने वालों को सजा मिलने के बजाय उन्हें चुपके से बड़े पदों पर बिठा दिया जाता है।
"किसी को बख्शा नहीं जाएगा" – राहुल का वादा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोलते हुए राहुल गांधी ने देश के युवाओं को न्याय का भरोसा दिलाया। उन्होंने लिखा:
"मेरे युवा साथियों, आपका दर्द मेरा दर्द है। आपकी मेहनत मेरी मेहनत है। आपका भविष्य चुराने वालों को जवाब देना ही होगा। चाहे जितना वक्त लगे, किसी को बख्शा नहीं जाएगा – यह मेरा वादा है।"
मुख्य आरोप और चिंताएं:
मेडिकल परीक्षाओं में सेंध: अकेले NEET और AIPMT जैसी मेडिकल परीक्षाओं में 15 घोटाले हुए।
जवाबदेही का अभाव: सरकार दोषियों को दंडित करने के बजाय मामले को रफा-दफा करने की कोशिश कर रही है।
भविष्य की सुरक्षा: बार-बार पेपर लीक होने से छात्रों का मेहनत और ईमानदारी से भरोसा उठ रहा है।
निष्कर्ष: राहुल गांधी के इस कड़े रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि विपक्ष इस मुद्दे को संसद से लेकर सड़क तक छोड़ने वाला नहीं है। 9 करोड़ प्रभावित युवाओं का मुद्दा उठाकर उन्होंने सरकार को बैकफुट पर धकेलने की कोशिश की है। अब देखना यह है कि केंद्र सरकार इन गंभीर आरोपों और जवाबदेही के सवालों पर क्या प्रतिक्रिया देती है।





