लखनऊ | उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित 'संविधान सम्मेलन' को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने न केवल केंद्र सरकार और आरएसएस (RSS) पर तीखा हमला बोला, बल्कि अपनी ही पार्टी के इतिहास और कमियों पर आत्ममंथन भी किया। राहुल ने दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों के प्रतिनिधित्व को लेकर कांग्रेस की प्रतिबद्धता दोहराते हुए 'जातिगत जनगणना' को देश की जरूरत बताया।
आत्ममंथन: कांग्रेस की कमियां और कांशीराम का उदय
राहुल गांधी ने दलित राजनीति के पुरोधा कांशीराम का जिक्र करते हुए एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि:
ऐतिहासिक चूक: कांग्रेस में कुछ कमियां थीं, जिसका परिणाम यह हुआ कि कांशीराम को अपनी अलग जमीन तैयार करनी पड़ी।
नेहरू और प्रतिनिधित्व: राहुल ने कहा, "अगर जवाहरलाल नेहरू आज जीवित होते, तो कांशीराम कांग्रेस के मुख्यमंत्री होते।" उन्होंने संकेत दिया कि कांग्रेस का लक्ष्य अब उन वर्गों को वापस मुख्यधारा में लाना है जो प्रतिनिधित्व की कमी के कारण दूर हो गए थे।
सरकार और RSS पर प्रहार: "जितनी आबादी, उतनी भागीदारी"
राहुल गांधी ने डेटा और उदाहरणों के जरिए केंद्र सरकार और आरएसएस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए:
संस्थानों में भागीदारी: उन्होंने आरोप लगाया कि किसी भी बड़े अस्पताल के शीर्ष डॉक्टरों या मंत्रालयों के सचिवों में दलित, पिछड़ा या आदिवासी समाज का प्रतिनिधित्व न के बराबर है।
आर्थिक असमानता: राहुल ने तंज कसते हुए कहा कि मनरेगा की लिस्ट में तो 85% पिछड़े और दलित मिल जाएंगे, लेकिन जब धन और पावर बांटने की बात आती है, तो उन्हें किनारे कर दिया जाता है।
RSS का ढांचा: उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि आरएसएस के वरिष्ठ पदों की सूची निकालकर देख लें, वहां आपको ओबीसी या दलित चेहरा नहीं मिलेगा।
ऊर्जा सुरक्षा और विदेशी नीति पर गंभीर आरोप
राहुल गांधी ने देश की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा निशाना साधा:
तेल और समझौता: राहुल ने आरोप लगाया कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा से समझौता किया गया है। अब अमेरिका तय कर रहा है कि भारत तेल कहाँ से खरीदेगा।
मंत्री पद पर सवाल: उन्होंने पेट्रोलियम मंत्री की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए इसे 'ब्यूरोक्रेसी से उठाकर बनाया गया पहला समझौता' करार दिया।
आगामी रणनीति: जातिगत जनगणना और पावर सेंटर
राहुल गांधी ने साफ किया कि कांग्रेस अब पीछे हटने वाली नहीं है। उन्होंने कहा:
"कांग्रेस पार्टी ने अब मन बना लिया है कि जातिगत जनगणना होकर रहेगी। हमारा उद्देश्य पिछड़ों और दलितों को केवल नाम के लिए नहीं, बल्कि वास्तविक 'पावर सेंटर' में जगह दिलाना है।"
आंबेडकर, गांधी और कांशीराम का जिक्र
विपक्षी नेताओं और सावरकर की तुलना करते हुए राहुल ने कहा कि बाबासाहेब आंबेडकर, महात्मा गांधी और कांशीराम ने अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया, जबकि मौजूदा नेतृत्व के संगठनों की आदत ही समझौतों पर टिकी है।





