नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल और असम के चुनावी नतीजों ने देश की राजनीति में एक नया उबाल पैदा कर दिया है। जहाँ एक ओर भाजपा 206 सीटें जीतकर इतिहास रचने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन नतीजों को 'लोकतंत्र की हत्या' करार दिया है।

राहुल गांधी की अपनी ही पार्टी को दोटूक

मंगलवार को राहुल गांधी ने एक बड़ा बयान देते हुए उन कांग्रेस सदस्यों को जमकर फटकार लगाई, जो बंगाल में ममता बनर्जी की करारी हार पर खुशी मना रहे थे। राहुल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लिखा:

"कांग्रेस सहित अन्य पार्टियों में जो लोग TMC की हार पर खुश हो रहे हैं, उन्हें समझ लेना चाहिए कि असम और बंगाल के जनादेश की चोरी भाजपा द्वारा भारतीय लोकतंत्र को खत्म करने की दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम है।"

राहुल ने विपक्षी दलों से अपील की कि वे 'छोटी-मोटी राजनीति' छोड़कर देश को बचाने के लिए एकजुट होकर लड़ें।

'चुनाव आयोग के साथ मिलकर चुराई गईं 100 सीटें'

राहुल गांधी ने ममता बनर्जी के उस दावे का पुरजोर समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने भाजपा पर 100 से अधिक सीटें 'चुराने' का आरोप लगाया था। राहुल ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग (EC) के समर्थन से भाजपा ने बंगाल और असम में चुनाव चुरा लिए हैं।

ममता बनर्जी ने इस जीत को 'अनैतिक और अवैध' बताते हुए कहा, "चुनाव आयोग सिर्फ भाजपा की बात मानता है। हमने अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन हमारी बात अनसुनी कर दी गई।"

भाजपा का पलटवार: 'डॉ. मुखर्जी के सपने की पूर्ति'

विपक्ष के इन गंभीर आरोपों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा की इस प्रचंड जीत को राज्य के भविष्य के लिए ऐतिहासिक बताया। प्रधानमंत्री ने कहा:

यह जीत डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के उस सपने की पूर्ति है, जो उन्होंने बंगाल के लिए देखा था।

भाजपा के लिए यह सिर्फ सत्ता नहीं, बल्कि बंगाल को सुरक्षित और समृद्ध बनाने के मिशन की पुष्टि है।

सत्ता का गणित: 2021 बनाम 2026

पार्टी2021 की सीटें2026 की सीटेंस्थिति
भाजपा77206प्रचंड बहुमत (ऐतिहासिक उदय)
टीएमसी21280सत्ता से बाहर (करारी हार)

निष्कर्ष: बंगाल की राजनीति में आए इस बड़े भूचाल ने विपक्ष को जहाँ एकजुट होने पर मजबूर कर दिया है, वहीं भाजपा ने 206 सीटों के साथ बंगाल की सत्ता में अपना पहला और सबसे बड़ा कदम रख दिया है। विपक्ष का 'वोट चोरी' का आरोप आने वाले दिनों में संसद से सड़क तक बड़े विवाद का रूप ले सकता है।