नई दिल्ली/चंडीगढ़ | देश के तीन राज्यों—बिहार, ओडिशा और हरियाणा की 11 राज्यसभा सीटों पर हुए हाई-प्रोफाइल चुनाव के परिणाम घोषित हो गए हैं। इस चुनाव में एनडीए (NDA) ने अपनी रणनीतिक बढ़त बनाए रखते हुए 11 में से 9 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की है। हालांकि, हरियाणा में भाजपा एक बेहद करीबी मुकाबले में मामूली अंतर से 10वीं सीट जीतने से चूक गई।

हरियाणा: 0.33% वोट वैल्यू का वह 'कांटा'

हरियाणा की दो सीटों पर हुआ चुनाव सबसे ज्यादा रोमांचक रहा। यहाँ भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को हार का सामना करना पड़ा।

वोट गणित: सतीश नांदल को कुल 2733 वोट वैल्यू मिली, जबकि जीत के लिए 2767 की आवश्यकता थी। वे महज 34 वोट वैल्यू (लगभग 0.33%) से पिछड़ गए।

नतीजा: दो सीटों में से एक भाजपा के संजय भाटिया ने जीती, जबकि दूसरी सीट पर कांग्रेस के करमवीर सिंह बौध ने बाजी मारी। यहाँ कांग्रेस के 5 वोट अवैध घोषित होने के बावजूद भाजपा समर्थित उम्मीदवार को हार का स्वाद चखना पड़ा।

बिहार: नीतीश कुमार और नितिन नवीन की बड़ी जीत

बिहार की सभी 5 सीटों पर एनडीए ने विपक्षी गठबंधन का सूपड़ा साफ कर दिया। यहाँ महागठबंधन के विधायकों की अनुपस्थिति और रणनीति की कमी के कारण एनडीए के सभी उम्मीदवार विजयी रहे:

विजेता: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, रालोमो अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा, केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर और भाजपा के शिवेश कुमार

विपक्षी उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह (RJD) को हार का सामना करना पड़ा क्योंकि विपक्ष के 4 विधायक वोट डालने ही नहीं पहुँचे।

ओडिशा: नवीन पटनायक के गढ़ में भाजपा की सेंध

ओडिशा की 4 सीटों के परिणामों ने बीजेडी (BJD) को चौंका दिया है। यहाँ भाजपा ने 4 में से 3 सीटों पर कब्जा किया:

विजेता (BJP): ओडिशा भाजपा अध्यक्ष मनमोहन सामल, सुजीत कुमार और भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप रे

विजेता (BJD): बीजेडी की ओर से केवल संतृप्त मिश्रा ही अपनी सीट बचा पाए। यहाँ विपक्षी खेमे में बड़े पैमाने पर हुई क्रॉस-वोटिंग ने भाजपा समर्थित दिलीप रे की राह आसान कर दी।

निष्कर्ष

इन चुनावों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि राज्यसभा की बिसात पर 'सेकंड प्रेफरेंस' और छोटे दलों का समर्थन कितना महत्वपूर्ण होता है। भाजपा ने जहाँ बिहार और ओडिशा में अपना लोहा मनवाया, वहीं हरियाणा के नतीजों ने कांग्रेस को एक नई संजीवनी दी है।