अयोध्या / नई दिल्ली।

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे और चंदे की कथित हेराफेरी का मामला अब एक देशव्यापी राजनीतिक तूफान में बदल चुका है। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय द्वारा पद से इस्तीफा देने की खबरों के बीच, विपक्ष ने सरकार और जांच एजेंसियों के खिलाफ मोर्चा पूरी तरह खोल दिया है। इस मामले में उत्तर प्रदेश की विशेष जांच टीम (SIT) की शुरुआती रिपोर्ट लीक होने के बाद अब समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सीधे तौर पर राज्य व केंद्र सरकार को घेरा है।

"फुनगी को फांसी, शाखाओं को माफी": अखिलेश यादव का बड़ा हमला

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर पोस्ट कर इस पूरी जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा:

"भाजपा राज में नाइंसाफ़ी की दिखेगी ये झांकी, फुनगी को फांसी, शाखाओं को मिलेगी माफ़ी! जनता कह रही है कि पहले SIT के बहाने सारे सबूत साफ़ कर दिये गये होंगे और ये निश्चित कर लिया गया होगा कि किन बड़ी मछलियों को बचाना है और किसको फंसाना है, उसके बाद FIR हो रही है।"

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे एसआईटी को निष्कर्ष पहले ही दे दिया गया था और रिपोर्ट उसी के हिसाब से 'स्क्रिप्टेड' तरीके से तैयार की गई है।

आज रामलला के दरबार में अरविंद केजरीवाल, उठाए कई सवाल

आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल गुरुवार को ही अयोध्या पहुंच चुके हैं और आज वे राम मंदिर में दर्शन करेंगे। अयोध्या पहुंचते ही केजरीवाल ने ट्रस्ट और सरकार पर करारा हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने बड़े घोटाले में बिना किसी शुरुआती एफआईआर के सीधे एसआईटी का गठन क्यों किया गया? उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब पदाधिकारियों की लापरवाही और बड़े चेहरों को बचाने के लिए आनन-फानन में की गई कागजी कार्रवाई है।

वहीं, आप सांसद संजय सिंह ने भी हमला जारी रखते हुए पूछा, "अरविंद केजरीवाल जी के अयोध्या आते ही आनन-फानन में एफआईआर तो कर ली गई, लेकिन इतने दिनों से कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही थी? चंदा चोरी करने वाले और मोदी के करीबी चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव आखिर जेल कब जाएंगे?"

एसआईटी की शुरुआती लीक रिपोर्ट में क्या है?

सूत्रों के मुताबिक, लीक हुई एसआईटी रिपोर्ट ने मंदिर के आंतरिक प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं:

बेलगाम प्रबंधन: चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया पूरी तरह बेलगाम थी और वित्तीय वर्ष 2022-23 से लेकर 2024-25 तक की ऑडिट रिपोर्टों में दानपात्रों (हुंडियों) की संख्या और अभिलेखों में भारी अंतर मिला।

कमजोर सुरक्षा व्यवस्था: परिसर में पर्याप्त सीसीटीवी कैमरे नहीं थे और सुरक्षा प्रोटोकॉल जमीनी स्तर पर लागू होने के बजाय केवल कागजी औपचारिकता बनकर रह गए थे।

वीएचपी और सरकार का रुख: 'पेशेवर सीईओ की हो नियुक्ति'

इस भारी राजनीतिक घमासान के बीच, विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने विपक्षी दलों पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि 2027 के यूपी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर ऑल पार्टी कमेटी या इंटरपोल जांच जैसी राजनीतिक बयानबाजी की जा रही है। हालांकि, उन्होंने माना कि व्यवस्था सुधारने की जरूरत है। उन्होंने सुझाव दिया कि:

"राम मंदिर ट्रस्ट को अब एक पेशेवर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त करना चाहिए, जो तकनीकी का इस्तेमाल करके भविष्य के लिए एक फुल प्रूफ सुरक्षा और प्रबंधन प्लान तैयार कर सके।"

दूसरी तरफ, केंद्रीय मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह और बीजेपी सांसद राहुल सिन्हा ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि करोड़ों लोगों की आस्था से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और इस मामले में अब तक 8 लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है।