नई दिल्ली:

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रल्हाद जोशी को देश का नया शिक्षा मंत्री बनाए जाने पर विपक्ष ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस नियुक्ति पर गहरी हैरानी जताते हुए बीजेपी पर तीखा हमला बोला और प्रल्हाद जोशी को 'रेपिस्टों का बचाव करने वाला' करार दिया।

संसद भवन के बाहर पत्रकारों से रूबरू होते हुए राहुल गांधी ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "भारत के नए शिक्षा मंत्री के अतीत को देखिए। जब देश के अनगिनत युवा शिक्षा व्यवस्था की खामियों को लेकर सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे..." तभी पास में मौजूद उनकी बहन और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने बात जोड़ते हुए कहा, "प्रदर्शन करने वालों में बड़ी संख्या में बेटियां भी थीं, जिन्हें सड़कों पर पीटा गया।"

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए राहुल गांधी ने बेहद कड़े शब्दों में कहा, "बीजेपी ने एक ऐसे व्यक्ति को देश की शिक्षा व्यवस्था की कमान सौंपी है जो बलात्कारियों का ढाल बनता रहा है। जो इंसान यह कहे कि बलात्कारियों को सुरक्षा की जरूरत है, उससे ज्यादा संवेदनहीन कोई नहीं हो सकता। प्रधानमंत्री के पास अपने मंत्रिमंडल में कई विकल्प मौजूद थे, लेकिन उन्होंने जानबूझकर ऐसे व्यक्ति को चुना। यह बेहद अजीब और चौंकाने वाला फैसला है।"

क्या है विवाद की मुख्य वजह?

नरेंद्र मोदी कैबिनेट के सबसे अनुभवी चेहरों में शामिल और पांच बार के लोकसभा सांसद प्रल्हाद जोशी 2018 में संसदीय कार्य मंत्री थे। उस दौरान 2002 के गुजरात दंगों के चर्चित बिलकिस बानो सामूहिक दुष्कर्म और उनके परिवार की हत्या के मामले में उम्रकैद काट रहे 11 दोषियों को गुजरात सरकार द्वारा समय से पहले रिहा कर दिया गया था।

उस समय प्रल्हाद जोशी ने इस रिहाई का पुरजोर बचाव किया था। एक समाचार चैनल (NDTV) को दिए साक्षात्कार में जोशी ने कहा था, "जब सरकार और संबंधित प्राधिकारियों ने नियमानुसार फैसला लिया है, तो मुझे इसमें कुछ भी गलत नजर नहीं आता। यह कानून की स्थापित प्रक्रिया के तहत हुआ है।" उन्होंने दोषियों के 'अच्छे आचरण' का हवाला देकर सरकार के फैसले को जायज ठहराया था।

सुप्रीम कोर्ट से लगा था झटका

हालांकि, प्रल्हाद जोशी और गुजरात सरकार के इस रुख को साल 2024 में देश की सर्वोच्च अदालत से बड़ा झटका लगा था। सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों की समय पूर्व रिहाई के आदेश को पूरी तरह रद्द करते हुए स्पष्ट किया था कि सजा में छूट देने का अधिकार संबंधित अधिकारियों के पास था ही नहीं और यह निर्णय क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर लिया गया था।

अब इसी अतीत की पृष्ठभूमि को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार की नीयत पर सवाल खड़े कर दिए हैं और प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय दिए जाने पर विरोध तेज कर दिया है।