नई दिल्ली:

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा कानूनी और राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के 6 सांसदों के टूटकर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने और लोकसभा अध्यक्ष द्वारा इस विलय को मान्यता दिए जाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। मंगलवार को उद्धव ठाकरे गुट ने शीर्ष अदालत से इस याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग की।

सुप्रीम कोर्ट में क्या बोले वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत?

उद्धव ठाकरे गुट की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए इसे गंभीर संवैधानिक प्रश्न बताया:

"लोकसभा अध्यक्ष ने संसद का सत्र शुरू होने से ठीक पहले सांसदों के विलय को मान्यता दे दी। इससे संसद में राजनीतिक दल के रूप में हमारा कामकाज पूरी तरह से ठप हो गया है। निर्वाचित सांसद पार्टी की सहमति के बिना प्रतिद्वंद्वी दल में विलय नहीं कर सकते। दोनों गुटों के बीच का मूल विवाद पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।"

याचिकाकर्ता ने मामले की तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया, जिस पर चीफ जस्टिस ने मामले को जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर विचार करने का आश्वासन दिया।

संसद में बदला सीटों का गणित

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा विलय को दी गई मान्यता के बाद संसद में दोनों गुटों की स्थिति पूरी तरह बदल गई है:

शिंदे गुट (शिवसेना): सांसदों की संख्या 7 से बढ़कर 13 हो गई है।

उद्धव गुट (शिवसेना UBT): लोकसभा में सांसदों की संख्या घटकर अब सिर्फ 3 रह गई है।

विभाजित होने वाले 6 सांसद:

संजय देशमुख (यवतमाल)

संजय जाधव (परभणी)

संजय दीना पाटिल (मुंबई उत्तर पूर्व)

नागेश पाटिल-अष्टिकार (हिंगोली)

ओमप्रकाश राजेनिंबालकर (धाराशिव)

भाऊसाहेब वाकचौरे (शिर्डी)

2022 से जारी है राजनीतिक और कानूनी लड़ाई

साल 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुए विद्रोह के बाद महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे नीत महा विकास अघाड़ी (MVA) सरकार गिर गई थी। इसके बाद 17 फरवरी 2023 को चुनाव आयोग (ECI) ने एकनाथ शिंदे गुट को ही असली 'शिवसेना' मानते हुए मूल चुनाव चिन्ह 'तीर-धनुष' आवंटित कर दिया था।

उद्धव ठाकरे गुट ने चुनाव आयोग के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जो मामला अभी भी विचाराधीन है। अब संसद में सांसदों के विलय का यह नया विवाद शीर्ष अदालत के समक्ष पहुंचने से राजनीतिक सरगर्मियां और तेज हो गई हैं।