रालेगण सिद्धि (अहमदनगर):

सूचना के अधिकार (RTI) कानून के जनक और देश के वरिष्ठ समाजसेवी अन्ना हजारे एक बार फिर बड़े जनआंदोलन के मूड में हैं। महाराष्ट्र सरकार द्वारा आगामी 12 जून 2026 को लागू की गई नई आरटीआई नियमावली के विरोध में अन्ना हजारे ने 5 जुलाई 2026 से अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठने का शंखनाद कर दिया है। अन्ना हजारे का साफ आरोप है कि नए नियम इस ऐतिहासिक कानून की आत्मा को कमजोर करते हैं और आम जनता के सूचना पाने के मूल अधिकार पर सीधा आघात हैं।

सरकार की ओर से अब तक कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया न मिलने के कारण अन्ना अपने फैसले पर अडिग हैं। 90 वर्ष की आयु को देखते हुए कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने उनके स्वास्थ्य पर गहरी चिंता व्यक्त की है। अनशन से पहले पुणे के रूबी हॉल क्लिनिक में उनकी सभी जरूरी मेडिकल जांचें कराई जा रही हैं।

रालेगण सिद्धि के ग्रामीणों का समर्थन; 3 जुलाई को फूकेगा पुतला

अन्ना हजारे के इस आह्वान के बाद उनके गृह ग्राम रालेगण सिद्धि के लोगों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने इस आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन देने का एलान किया है। इसके तहत 3 जुलाई 2026 को गाँव के मुख्य चौक पर सरकार की नई आरटीआई नियमावली के विरोध में एक प्रतीकात्मक पुतले का दहन किया जाएगा। ग्रामीणों ने आम जनता से इस जनआंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है।

विवाद की जड़: क्या हैं RTI नियमावली में नए बदलाव?

अन्ना हजारे और आरटीआई कार्यकर्ताओं का मानना है कि सरकार द्वारा किए गए निम्नलिखित 7 बदलाव पारदर्शी व्यवस्था के खिलाफ हैं:

फीस में भारी बढ़ोतरी: आरटीआई आवेदन की फीस को 10 रुपये से सीधे बढ़ाकर 30 रुपये कर दिया गया है।

पहचान का सबूत: अब आवेदन के साथ सरकारी पहचान पत्र (ID Proof) जोड़ना अनिवार्य होगा।

शब्दों की सीमा: आवेदन की लंबाई को सीमित करते हुए अधिकतम 150 शब्द तय कर दिए गए हैं।

कड़ा नियम: "एक विषय, एक एप्लीकेशन" का नियम लागू किया गया है; यानी एक फॉर्म में कई तरह की जानकारियां नहीं मांगी जा सकेंगी।

मकसद बताना जरूरी: अब आवेदक को यह स्पष्ट करना होगा कि वह यह जानकारी क्यों मांग रहा है।

वकील पर पाबंदी: सूचना आयोग (Information Commission) की सुनवाई के दौरान अब किसी भी प्रकार के कानूनी प्रतिनिधित्व या वकील की इजाजत नहीं होगी।

अनुपस्थिति पर कड़ा एक्शन: यदि सुनवाई के दिन आवेदक किसी कारणवश मौजूद नहीं रहता है, तो उसकी अपील सीधे खारिज की जा सकती है।

"अदृश्य ताकतों से लड़ना होगा" — अन्ना हजारे

अन्ना हजारे ने देश और प्रदेश के नागरिकों से इस कानून को बचाने के लिए आगे आने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आरटीआई कानून को जन-जन की ताकत माना जाता था, लेकिन नए नियम इसे सरकारी दफ्तरों की फाइलों में दफन करने की साजिश हैं।

राजनीतिक गलियारों में अन्ना के इस कदम के बाद हड़कंप मच गया है, क्योंकि अतीत में अन्ना के अनशनों ने बड़े-बड़े राजनीतिक समीकरणों को हिला कर रख दिया है। अब देखना यह होगा कि 5 जुलाई से पहले महाराष्ट्र सरकार इस गतिरोध को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाती है।