कोलकाता पश्चिम बंगाल में कथित हस्ताक्षर जालसाजी मामले को लेकर राजनीतिक और कानूनी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सोमवार को राज्य के अपराध जांच विभाग (CID) के अधिकारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के आवास पर पहुंचे। सीआईडी अधिकारियों का यह दौरा अभिषेक बनर्जी को मामले में पूछताछ के लिए दूसरा नोटिस (समन) तामिल कराने के सिलसिले में हुआ।

बीमारी का हवाला देकर मांगा था वक्त

इससे पहले, सोमवार को ही अभिषेक बनर्जी ने अपनी खराब सेहत का हवाला देते हुए सीआईडी के सामने पेश होने में असमर्थता जताई थी। उन्होंने जांच एजेंसी से राहत की अपील करते हुए अपनी स्थिति में सुधार के लिए 15 दिनों का अतिरिक्त समय मांगा था।

हालांकि, सीआईडी ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तत्परता दिखाई और कुछ ही घंटों के भीतर दूसरा नोटिस देने के लिए उनके आवास का रुख कर लिया।

"वह कब तक बच सकते हैं?" — सुकांत मजूमदार का तीखा हमला

इस पूरे घटनाक्रम पर सियासी बयानबाजी भी चरम पर पहुंच गई है। केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री और भाजपा नेता सुकांत मजूमदार ने अभिषेक बनर्जी और टीएमसी पर तीखा हमला बोला है। मजूमदार ने आरोप लगाया कि यह सब केंद्रीय एजेंसियों और जांच से बचने का एक पूर्व-नियोजित तरीका है।

भाजपा नेता सुकांत मजूमदार ने सोमवार को मीडिया से बात करते हुए कहा:

"मैंने पहले ही कह दिया था कि ऐसा कोई प्लान (योजना) बन रहा है। जब कुछ दिनों पहले तृणमूल के ही कुछ नेता अभिषेक बनर्जी पर कथित तौर पर हमला करने की कोशिश करते हुए पकड़े गए थे, तभी मुझे शक हो गया था। आज उन्होंने समन से बचने की कोशिश की है। लेकिन उन्हें आखिरकार कानून के सामने पेश होना ही होगा। वह कब तक इससे बच सकते हैं?"

मामले की पृष्ठभूमि

यह पूरा विवाद एक कथित हस्ताक्षर जालसाजी (Signature Forgery) से जुड़ा हुआ है, जिसमें सीआईडी गहराई से जांच कर रही है। विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर टीएमसी नेतृत्व को घेर रहा है, जबकि टीएमसी इसे राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई बता रही है। सीआईडी द्वारा दूसरा नोटिस जारी किए जाने के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अभिषेक बनर्जी का अगला कदम क्या होगा।