चंडीगढ़/जालंधर: पंजाब की राजनीति में 'आम आदमी पार्टी' (आप) के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा सहित सात सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने के बाद अब पार्टी के लोकसभा कुनबे में भी सेंधमारी के संकेत मिल रहे हैं। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने दावा किया है कि आम आदमी पार्टी के दो और लोकसभा सांसद जल्द ही पार्टी को अलविदा कह सकते हैं।

मजीठिया का 'एक्स' पर बड़ा धमाका

बिक्रम सिंह मजीठिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री भगवंत मान को टैग करते हुए एक तंज भरा पोस्ट साझा किया। उन्होंने लिखा:

"एक और दिन, एक और विदाई की तैयारी... सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा के दो और सांसद जल्द ही आम आदमी पार्टी छोड़ सकते हैं। 'बार-बार उड़ान भरने वालों' की लिस्ट लगातार लंबी होती जा रही है।"

मजीठिया के इस दावे ने पंजाब से लेकर दिल्ली तक की राजनीति में कयासों का दौर शुरू कर दिया है। हालांकि, आम आदमी पार्टी की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

क्या कहता है दल-बदल विरोधी कानून?

अगर मजीठिया का दावा सच साबित होता है, तो आम आदमी पार्टी के लिए यह तकनीकी और राजनीतिक दोनों रूप से बड़ी हार होगी:

लोकसभा का गणित: वर्तमान में पंजाब से 'आप' के 3 लोकसभा सदस्य हैं।

दो-तिहाई का खेल: भारत के दल-बदल विरोधी कानून के अनुसार, यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई सदस्य एक साथ पार्टी छोड़ते हैं, तो उनकी सदस्यता बरकरार रहती है।

अयोग्यता से बचाव: यदि 3 में से 2 सांसद एक साथ पार्टी छोड़कर किसी अन्य दल में शामिल होते हैं, तो वे अयोग्य घोषित होने से बच जाएंगे। ऐसी स्थिति में 'आप' के पास लोकसभा में मात्र एक सांसद रह जाएगा।

राघव चड्ढा के जाने से पहले ही लगी है चोट

आम आदमी पार्टी में फूट की शुरुआत तब हुई जब पार्टी के युवा चेहरे राघव चड्ढा ने 'आप' पर "भ्रष्ट और समझौतावादी" होने का आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ दी। चड्ढा अपने साथ राज्यसभा के दो-तिहाई सदस्यों को लेकर भाजपा में शामिल हो गए, जिसे पार्टी ने बड़ा "विश्वासघात" करार दिया था।

अस्तित्व के संकट में 'आप'

मजीठिया के दावे ने भगवंत मान सरकार की पेशानी पर बल डाल दिए हैं। यदि यह टूट होती है, तो संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में आम आदमी पार्टी की ताकत घटकर बेहद कम रह जाएगी। जानकारों का मानना है कि पंजाब में पार्टी के भीतर बढ़ता असंतोष और केंद्रीय नेतृत्व के प्रति नाराजगी सांसदों के इस पलायन की मुख्य वजह हो सकती है।

निष्कर्ष: पंजाब की सियासत में आने वाले कुछ दिन बेहद निर्णायक होने वाले हैं। क्या भगवंत मान अपने बचे हुए सांसदों को एकजुट रख पाएंगे या मजीठिया की भविष्यवाणी सच साबित होगी, यह देखना दिलचस्प होगा।