राजनीतिक डेस्क, कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के महज एक महीने बाद ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर की असहज स्थिति और अंदरूनी कलह खुलकर सड़कों पर आ गई है। पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी द्वारा कोलकाता के कालीघाट स्थित अपने आवास पर बुलाई गई विधायकों की बेहद महत्वपूर्ण बैठक में विधायकों की भारी अनुपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में सनसनी मचा दी है। 80 विधायकों वाली पार्टी की इस बैठक में केवल 20 विधायक ही पहुंचे, जिसके चलते ममता बनर्जी को बैठक स्थगित करने पर मजबूर होना पड़ा।
यह घटनाक्रम पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी पर सोनारपुर में हुए हमले के ठीक एक दिन बाद सामने आया है, जिसने संगठन के भीतर पनप रहे असंतोष को और हवा दे दी है।
अपेक्षा से बेहद कम उपस्थिति, खुद ममता भी नहीं आईं सामने
सूत्रों के मुताबिक, जब ममता बनर्जी को यह जानकारी मिली कि बैठक में अपेक्षा से बहुत कम संख्या में विधायक पहुंचे हैं, तो वह स्वयं भी बैठक में शामिल होने नहीं आईं। इसके बाद, विधानसभा में विपक्ष के नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय के माध्यम से उपस्थित 20 विधायकों को बैठक स्थगित होने की आधिकारिक जानकारी दी गई, जिसके बाद सभी विधायक वापस लौट गए।
पार्टी ने दी सफाई, गिनाईं ये वजहें:
बैठक से बाहर निकलने पर पार्टी विधायक और प्रवक्ता कुणाल घोष ने स्थिति को संभालने की कोशिश की। उन्होंने बैठक टलने के पीछे आंतरिक कलह की बात को खारिज करते हुए कहा:
"शनिवार को सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी और रविवार को हुगली में वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी पर हुए हमलों के बाद राज्यभर में तृणमूल कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे हैं। कई स्थानों पर पुलिस ने कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया है, इसलिए विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों में रहने की इच्छा जताई थी और फोन पर बैठक टालने का अनुरोध किया था।"
आखिर क्यों बुलाई गई थी यह आपात बैठक?
इस बैठक के एजेंडे में कई संवेदनशील मुद्दे शामिल थे, जिन पर चर्चा होनी बाकी थी:
हस्ताक्षर विवाद और CID जांच: विधानसभा में विपक्ष के नेता के चयन से जुड़े हस्ताक्षर विवाद में सीआइडी (CID) की जांच चल रही है, जिसके तहत कई टीएमसी विधायकों को नोटिस जारी किए गए हैं।
कार्यकर्ताओं की सुरक्षा: चुनाव के बाद विभिन्न क्षेत्रों में तृणमूल कार्यकर्ताओं पर हो रहे हमलों को लेकर शीर्ष नेतृत्व गंभीर चिंता में है।
लगातार तीसरी बैठक से विधायकों की दूरी; कप्तानी पर सवाल!
यह पहला मौका नहीं है जब ममता बनर्जी की बैठक से विधायकों ने दूरी बनाई हो। सत्ता गंवाने के बाद से ही टीएमसी नेतृत्व के खिलाफ असंतोष गहराता दिख रहा है:
| बैठक की तारीख | अनुपस्थित विधायकों की स्थिति |
|---|---|
| 4 मई (नतीजों के दो दिन बाद) | कई वरिष्ठ विधायक और नेता बैठक से नदारद रहे। |
| 19 मई (कालीघाट आवास पर बैठक) | पार्टी के 15 विधायक अनुपस्थित रहे। |
| आज की बैठक (ताजा घटनाक्रम) | 80 में से 60 विधायक गायब रहे, सिर्फ 20 पहुंचे। |
अभिषेक बनर्जी के खिलाफ असंतोष?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बैठकों से विधायकों की यह लगातार अनुपस्थिति पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, विशेषकर राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली के खिलाफ पनप रहे गहरे गुस्से को उजागर करती है। हाल ही में पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने दबी जुबान में अभिषेक के फैसलों पर सवाल उठाए थे, जो अब इस वॉकआउट के रूप में सतह पर आ गया है। फिलहाल, यह बैठक अब कब होगी, इसकी कोई नई तारीख तय नहीं की गई है।





