चेन्नई, तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के चौंकाने वाले नतीजों के बाद राज्य की सियासत और सिनेमा जगत में मची हलचल के बीच, थलाइवा रजनीकांत ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। रविवार को चेन्नई के पोइस गार्डन स्थित अपने आवास पर एक आपातकालीन प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर दिग्गज अभिनेता ने अपनी राजनीतिक स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट किया। पिछले कुछ दिनों से द्रमुक (DMK) प्रमुख एमके स्टालिन से मुलाकात और अभिनेता से नेता बने विजय की जीत पर उनकी प्रतिक्रिया को लेकर हो रही तीखी आलोचनाओं का रजनीकांत ने बेहद बेबाकी से जवाब दिया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रजनीकांत ने साफ शब्दों में कहा कि वे बहुत पहले ही राजनीति से दूरी बना चुके हैं और जो व्यक्ति इस रेस का हिस्सा ही नहीं है, उसके किसी से ईर्ष्या करने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता।

विजय के मुख्यमंत्री बनने पर लगा गहरा धक्का: रजनीकांत

सुपरस्टार रजनीकांत ने राज्य के नए राजनैतिक समीकरणों और अभिनेता विजय के मुख्यमंत्री बनने पर अपनी पहली प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने कहा:

"जब मैंने पहली बार सुना कि विजय मुख्यमंत्री बन गए हैं, तो मुझे गहरा धक्का लगा और मैं हैरान रह गया। विजय और मेरे बीच 28 साल की उम्र का अंतर है। उन्होंने राज्य की दो सबसे बड़ी स्थापित पार्टियों (द्रमुक और अन्नाद्रमुक) के खिलाफ अकेले खड़े होकर स्वतंत्र रूप से अपनी पहचान बनाई और यह ऐतिहासिक जीत हासिल की।"

एयरपोर्ट पर बधाई न देने के आरोपों को खारिज करते हुए थलाइवा ने कहा कि उन्होंने सोशल मीडिया (X) पर सबसे पहले विजय को शुभकामनाएं दी थीं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, "जो जिसके भाग्य में लिखा है, वह होकर रहेगा, और जो नहीं लिखा है, वह कभी नहीं होगा।"

"चुप रहता तो लोग झूठ को सच मान लेते", आलोचनाओं पर पलटवार

रजनीकांत ने बताया कि उन्हें यह प्रेस मीट इसलिए बुलानी पड़ी क्योंकि सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में उनके रुख को लेकर लगातार भ्रम फैलाया जा रहा था। उन्होंने कहा, "अगर मैं आज इन आलोचनाओं का जवाब नहीं देता, तो लोग झूठ को ही सच मान बैठते।"

एमके स्टालिन के साथ दोस्ती राजनीति के तराजू से परे

चुनाव नतीजों के बाद द्रमुक प्रमुख एमके स्टालिन से हुई अपनी मुलाकात का बचाव करते हुए रजनीकांत काफी भावुक नजर आए। उन्होंने आलोचकों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि स्टालिन के साथ उनका रिश्ता राजनीतिक नहीं, बल्कि बेहद निजी है।

रजनीकांत ने कहा, "हमारी दोस्ती राजनीति से परे है। मुझे इस बात का गहरा दुख था कि एमके स्टालिन को कोलाथुर सीट से हार का सामना करना पड़ा। रजनी इतना सस्ता या निम्न स्तर का व्यक्ति नहीं है जो किसी की हार पर अनावश्यक या घटिया बातें करे।"

निष्कर्ष: इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए रजनीकांत ने यह साफ कर दिया है कि वह तमिलनाडु की राजनीति के इस नए दौर में पूरी तरह तटस्थ हैं और फिल्मी दुनिया के अपने जूनियर सहकर्मी विजय की सफलता का सम्मान करते हैं।