मुंबई।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना (शिंदे गुट) के प्रमुख एकनाथ शिंदे ने राकांपा (शरदचंद्र पवार) प्रमुख शरद पवार के साथ हुई अपनी बहुचर्चित मुलाकात पर आखिरकार पूरी स्थिति साफ कर दी है। एक न्यूज़ चैनल को दिए विशेष इंटरव्यू में शिंदे ने कहा कि इस मुलाकात के पीछे कोई गुप्त राजनीतिक एजेंडा या संदेश नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि शरद पवार देश और राज्य के एक बेहद वरिष्ठ नेता हैं, और उनसे मिलना महाराष्ट्र की गौरवशाली राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा है।
बता दें कि हाल ही में विधानसभा परिसर में दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में हुई इस मुलाकात के बाद महाविकास अघाड़ी (MVA) सहित पूरी महाराष्ट्र की राजनीति में अटकलों का बाजार गर्म हो गया था।
कैबिनेट बैठक रोककर किया था पवार का स्वागत
मुलाकात की इनसाइड स्टोरी बताते हुए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा:
"शरद पवार साहब महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद को लेकर बुलाई गई एक उच्च स्तरीय बैठक में शामिल होने विधानसभा आए थे। जब मुझे सूचना मिली कि वे मेरे चैंबर के पास बैठे हैं, तो मैंने अपनी चालू कैबिनेट बैठक को कुछ देर के लिए रोका और शिष्टाचार के नाते उनसे मिलने चला गया। मैंने फूलों का गुलदस्ता देकर उनका स्वागत किया। हमारे बीच राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन बुजुर्गों का सम्मान करना हमारी परंपरा है।"
संजय राउत की आपत्ति और 'दुश्मनी' पर शिंदे का पलटवार
इस मुलाकात को लेकर शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत ने तीखी नाराजगी जताई थी। राउत ने कहा था कि शरद पवार जैसे कद के नेता का शिंदे के दफ्तर जाना उनकी राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाता है।
इस पर पलटवार करते हुए एकनाथ शिंदे ने विधानसभा के भीतर दिए अपने बयान को दोहराया और कहा— "राजनीतिक विरोधी कभी दुश्मन नहीं होते।" उन्होंने विपक्ष को नसीहत दी कि राजनीति में इतनी कड़वाहट नहीं होनी चाहिए कि बुनियादी शिष्टाचार ही खत्म हो जाए।
2019 के धोखे को 2022 में सुधारा: शिंदे
इंटरव्यू के दौरान एकनाथ शिंदे ने साल 2022 में हुए सत्ता परिवर्तन और उद्धव ठाकरे गुट पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने गठबंधन के समीकरणों पर बात करते हुए कहा:
विचारधारा की लड़ाई: "2022 में हमारा कदम सत्ता का लालच नहीं था। हम तो पहले से ही मंत्री थे। हमने बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा को बचाने के लिए अपने पद और सत्ता को दांव पर लगाया था।"
2019 का धोखा: "2019 के विधानसभा चुनाव के बाद जो हुआ, वह महाराष्ट्र की जनता, बीजेपी और खुद बालासाहेब के विचारों के साथ धोखा था। जनादेश शिवसेना-बीजेपी सरकार के लिए था। हमने 2022 में महाविकास अघाड़ी से नाता तोड़कर उसी ऐतिहासिक गलती को सुधारा था।"
इस स्पष्टीकरण के बाद भले ही शिंदे ने इसे महज एक 'शिष्टाचार भेंट' करार दिया हो, लेकिन चुनाव के इस दौर में शरद पवार और एकनाथ शिंदे की इस केमिस्ट्री ने राज्य के सियासी गलियारों में एक नई बहस जरूर छेड़ दी है।





