मुंबई।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों प्रतिद्वंदी धड़ों के बीच संभावित विलय को लेकर चल रही राजनीतिक अटकलों के बीच, राकांपा (शरदचंद्र पवार) की वरिष्ठ नेता और सांसद सुप्रिया सुले का एक बेहद भावुक और बड़ा बयान सामने आया है। सुप्रिया सुले ने दोनों गुटों के एक होने की चर्चाओं पर विराम लगाते हुए खुलासा किया कि पार्टी को एकजुट देखना उनके दिवंगत भाई और राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार की अंतिम इच्छा थी। उन्होंने कहा कि भाई के चले जाने के बाद अब परिवार इस गहरे दुख से धीरे-धीरे उबर रहा है, लेकिन राजनीतिक मोर्चे पर दूसरी तरफ से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिल रही है।

'भाई को गुजरे 5 महीने हो गए, उनके नाम पर लगे पूर्ण विराम'

पार्टी के दोनों धड़ों में विलय की नई राजनीतिक चर्चाओं पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सुप्रिया सुले ने कहा:

"मेरा भाई अब हमारे बीच नहीं है। इसलिए मेरे भाई को लेकर या उनके नाम पर चल रही तमाम राजनीतिक चर्चाओं पर अब पूरी तरह पूर्ण विराम लग जाना चाहिए। मेरे भाई को गुजरे पांच महीने हो चुके हैं और हमारा परिवार धीरे-धीरे इस असहनीय दुख से उबरने का प्रयास कर रहा है। मेरे भाई की आखिरी इच्छा यही थी कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुट एक हो जाएं और मिलकर राज्य व देश की जनता की सेवा करें।"

'सामने वाले पक्ष ने कहा—ऐसी कोई घटना ही नहीं हुई'

सुप्रिया सुले ने संगठन की तैयारियों और सामने वाले धड़े के रुख पर निराशा जताते हुए कहा कि वे दादा की इस अंतिम इच्छा को पूरा करने के लिए पूरी तरह तैयार थे। दादा के रहते हुए भी उनके मन में यही भावना थी और उनके जाने के बाद भी रही। लेकिन दूसरी तरफ से इस पर कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया।

उन्होंने आगे दर्द साझा करते हुए कहा, "जिस दिन दादा का निधन हुआ, उसी दिन हमारे कुछ वरिष्ठ नेताओं ने इस विषय का जिक्र किया था। लेकिन सामने वाले पक्ष ने बेहद असंवेदनशीलता दिखाते हुए यह कह दिया कि ऐसी कोई बात या ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं। इससे हमें गहरी मानसिक पीड़ा और दुख हुआ। एक तरफ हमने अपना भाई खोया था और दूसरी तरफ हम उनकी अंतिम इच्छा पूरी करने की कोशिश कर रहे थे, क्योंकि यह खुद मेरे भाई का प्रस्ताव था। जब उनका यह रुख देखा, तो हमने उसी दिन इस विषय को हमेशा-हमेशा के लिए खत्म कर दिया। हम स्वाभिमानी लोग हैं और अपने स्वाभिमान से कोई समझौता नहीं करेंगे।"

राजनीतिक गपशप से दूरी, शरद पवार के नेतृत्व में पार्टी एकजुट

यह राजनीतिक घटनाक्रम उस पृष्ठभूमि में बेहद अहम है जब साल 2023 में अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार के खिलाफ बगावत कर दी थी और एनसीपी के दो फाड़ कर महाराष्ट्र की महायुति सरकार में शामिल हो गए थे। सुप्रिया सुले ने विलय की हालिया अटकलों पर सीधे कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि वह किसी भी प्रकार की 'राजनीतिक गपशप' या अज्ञात सूत्रों की खबरों पर भरोसा नहीं करती हैं। उन्होंने साफ किया कि राकांपा (एसपी) के सभी 8 सांसद और विधायक पूरी मजबूती और एकजुटता के साथ शरद पवार के नेतृत्व में खड़े हैं और उनका पूरा ध्यान केवल देश व राज्य की जनसेवा पर केंद्रित है।