कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे और अंतिम चरण के तहत आज राज्य की 142 सीटों पर मतदान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। दक्षिण बंगाल के सात महत्वपूर्ण जिलों—कोलकाता, हावड़ा, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, हुगली, नदिया और पूर्व बर्द्धमान में सुबह से ही मतदाताओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। सत्ता की चाबी माने जाने वाले इन जिलों में शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करना चुनाव आयोग के लिए अग्निपरीक्षा के समान है।
सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम: 'छावनी' में तब्दील हुए पोलिंग बूथ
चुनाव आयोग ने संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। केंद्रीय बलों की सैकड़ों कंपनियां तैनात की गई हैं, ताकि मतदाता बिना किसी भय के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें। कोलकाता और आसपास के जिलों में चप्पे-चप्पे पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
भवानीपुर में 'नारेबाजी' पर सियासी घमासान: सुवेंदु अधिकारी का हमला
मतदान के बीच सबसे हॉट सीट मानी जाने वाली भवानीपुर में तनाव की स्थिति देखने को मिली। भाजपा उम्मीदवार सुवेंदु अधिकारी ने एक मतदान केंद्र पर अपने साथ हुई नारेबाजी की घटना पर कड़ा रुख अपनाया है।
'जय बांग्ला' के नारे: सुवेंदु ने आरोप लगाया कि जब वे मतदान केंद्र पर पहुंचे, तो वहां मौजूद कुछ लोगों ने 'जय बांग्ला' के नारे लगाकर उन्हें घेरने की कोशिश की।
बांग्लादेशी घुसपैठियों का आरोप: सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया कि नारेबाजी करने वाले लोग "बांग्लादेशी मूल के मुस्लिम" थे, जिनके नाम मतदाता सूची में भी दर्ज नहीं थे।
10 हजार वोटों का दावा: सुवेंदु ने मीडिया से बात करते हुए कहा:
"मैंने जानबूझकर उन्हें 15 मिनट तक नारेबाजी करने दिया ताकि उनकी हरकतें कैमरे में कैद हो सकें और जनता उनकी असलियत देख सके। इस घटना के बाद भवानीपुर के करीब 10 हजार हिंदू वोट भाजपा के पक्ष में शिफ्ट हो गए हैं।"
विपक्ष और प्रशासन की प्रतिक्रिया
सुवेंदु अधिकारी के इस बयान के बाद भवानीपुर में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। टीएमसी समर्थकों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे चुनावी ध्रुवीकरण की कोशिश बताया है। मौके पर मौजूद सुरक्षा बलों ने नारेबाजी कर रहे लोगों को हटाकर स्थिति को नियंत्रित किया, ताकि मतदान की प्रक्रिया प्रभावित न हो।
दूसरे चरण के प्रमुख जिले और चुनौतियां
| जिला | चुनावी महत्व |
|---|---|
| कोलकाता | शहरी मतदाता और राजनीतिक सत्ता का केंद्र। |
| उत्तर व दक्षिण 24 परगना | ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों का बड़ा बेल्ट, जहाँ हिंसा की आशंका रहती है। |
| हावड़ा व हुगली | औद्योगिक क्षेत्र और मिश्रित आबादी वाले संवेदनशील बूथ। |
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निष्कर्ष: बंगाल के रण का यह अंतिम चरण तय करेगा कि अगले पांच सालों के लिए 'नबन्ना' (सचिवालय) की कुर्सी पर कौन बैठेगा। जहाँ एक ओर ममता बनर्जी अपना गढ़ बचाने की जद्दोजहद में हैं, वहीं भाजपा और सुवेंदु अधिकारी 'परिवर्तन' के दावे के साथ मैदान में डटे हुए हैं।





