पटना/नई दिल्ली: बिहार की राजनीति में एक बड़े युग का अंत होने जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब राज्य की कमान छोड़कर देश की राजधानी दिल्ली में एक नई और सक्रिय पारी शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस बड़े बदलाव का सबसे पुख्ता संकेत तब मिला जब नीतीश कुमार ने बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। सूत्रों की मानें तो अब बिहार में एनडीए सरकार की कमान भाजपा के हाथों में जाने वाली है।

भाजपा तय करेगी नया चेहरा; टिकी सबकी निगाहें

नीतीश कुमार के पीछे हटने के फैसले के बाद अब गेंद भारतीय जनता पार्टी के पाले में है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा जैसे ही नए मुख्यमंत्री के नाम का औपचारिक ऐलान करेगी, नीतीश कुमार राजभवन जाकर अपना इस्तीफा सौंप देंगे। फिलहाल, एनडीए के भीतर अंतिम सहमति बनने की प्रक्रिया चल रही है।

अप्रैल में होगा भव्य शपथ ग्रहण समारोह

अटकलें तेज हैं कि अप्रैल के दूसरे सप्ताह तक बिहार की नई सरकार की तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी। भाजपा इस मौके को एक ऐतिहासिक उत्सव के रूप में भुनाने की तैयारी में है।

ऐतिहासिक क्षण: बिहार के इतिहास में यह पहली बार हो सकता है जब भाजपा का अपना मुख्यमंत्री पूर्ण रूप से सत्ता संभाले।

दिग्गजों की मौजूदगी: संभावना जताई जा रही है कि नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह भी शिरकत करेंगे।

इस्तीफे के समय पर बरकरार है 'सस्पेंस'

नीतीश कुमार के इस्तीफे की टाइमिंग को लेकर अभी भी संशय बना हुआ है। सवाल यह है कि क्या वे राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने से पहले इस्तीफा देंगे या बाद में? हालांकि, जानकारों का कहना है कि वे शपथ से पहले ही पद छोड़कर दिल्ली के लिए रवाना हो सकते हैं।

कौन होगा बिहार का अगला 'कैप्टन'?

राज्य के अगले मुख्यमंत्री को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। चर्चा है कि नया चेहरा नीतीश कुमार की पसंद का भी हो सकता है, जिन्हें उन्होंने हाल के दिनों में इशारों-इशारों में आगे बढ़ाया है। हालांकि, भाजपा अक्सर अपने फैसलों से चौंकाने के लिए जानी जाती है, ऐसे में किसी 'सरप्राइज' नाम से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

निष्कर्ष: बिहार में सत्ता परिवर्तन अब केवल समय की बात है। आने वाले कुछ दिन न केवल बिहार बल्कि देश की राजनीति के लिए भी बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं।