पटना: बिहार की सियासत एक बार फिर करवट ले रही है। एनडीए के भीतर नई सरकार के गठन को लेकर बिछ रही बिसात इस बार कुछ अलग और चौंकाने वाली नजर आ रही है। सियासी गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा इस बात की है कि सूबे की कमान इस बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के हाथों में जा सकती है, जबकि जदयू 'पावर बैलेंस' के लिए नए फॉर्मूले पर काम कर रही है।
मुख्यमंत्री पद पर भाजपा की दावेदारी और जदयू का 'काउंटर फॉर्मूला'
हालांकि जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने फिलहाल किसी भी नाम पर मुहर लगने से इनकार किया है, लेकिन अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री पद भाजपा के खाते में जाना लगभग तय है। एनडीए की औपचारिक बैठक अभी बाकी है, लेकिन जदयू ने अपनी शर्तें और दावेदारी स्पष्ट कर दी है।
तर्क दिया जा रहा है कि यदि भाजपा का मुख्यमंत्री बनता है, तो जदयू के पास दो उपमुख्यमंत्री होंगे। यह ठीक वैसा ही फॉर्मूला है जैसा नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री रहते भाजपा के दो डिप्टी सीएम (सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा) के साथ अपनाया गया था।
सामाजिक समीकरण: विजय चौधरी और निशांत कुमार के नामों की चर्चा
जदयू के भीतर से दो चेहरों को लेकर कयासों का बाजार गर्म है। माना जा रहा है कि सामाजिक संतुलन साधने के लिए पार्टी निम्नलिखित नामों को आगे बढ़ा सकती है:
विजय चौधरी: अगड़ी जाति के बड़े चेहरे के रूप में।
निशांत कुमार: पिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधित्व करने के लिए।
"यह फॉर्मूला वर्तमान सरकार की तरह ही सामाजिक न्याय और संतुलन पर आधारित होगा, ताकि हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।"
स्पीकर और गृह विभाग पर भी फंसा पेच
सत्ता के नए समीकरणों में सिर्फ मुख्यमंत्री पद ही नहीं, बल्कि अन्य महत्वपूर्ण पदों पर भी खींचतान संभव है:
विधानसभा अध्यक्ष: वर्तमान में मुख्यमंत्री जदयू से हैं, इसलिए स्पीकर भाजपा का है। यदि सीएम भाजपा का होता है, तो जदयू स्वाभाविक रूप से स्पीकर पद पर अपना दावा ठोकेगा।
गृह विभाग: वर्षों तक यह विभाग नीतीश कुमार के पास रहा, जो फिलहाल सम्राट चौधरी संभाल रहे हैं। चर्चा है कि यदि विजय चौधरी डिप्टी सीएम बनते हैं, तो जदयू गृह विभाग की जिम्मेदारी वापस अपने पाले में लेने की पुरजोर कोशिश करेगा।
नीतीश कुमार की 'सहमति' ही होगी अंतिम मुहर
भले ही भाजपा मुख्यमंत्री पद की ओर बढ़ रही हो, लेकिन नई सरकार का स्वरूप बिना नीतीश कुमार की रजामंदी के तय नहीं होगा। जानकारी के अनुसार, 26 मार्च के बाद जदयू कोर कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक होगी। इसके साथ ही, नई सरकार के 'कॉमन मिनिमम प्रोग्राम' में 'सात निश्चय-3' को प्राथमिकता देना जदयू की प्रमुख शर्त होगी।
बिहार की जनता की नजरें अब एनडीए की आगामी बैठक पर टिकी हैं, जहां इन तमाम अटकलों पर आधिकारिक मुहर लगेगी।





