पटना/नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा जंतर-मंतर पर प्रदर्शन समाप्त किए जाने के बाद अब इस पूरे मुद्दे पर तीखी राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. निखिल आनंद ने इस घटनाक्रम को राष्ट्र-विरोधी और सनातन-हिंदू विरोधी ताकतों की सोची-समझी साजिश करार दिया है।
वहीं, बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव ने धर्मेंद्र प्रधान के पद छोड़ने को बेहद 'दुखद' बताया है।
"शाहीन बाग और सिंघु बॉर्डर आंदोलन का ही तीसरा पार्ट था जंतर-मंतर का धरना": निखिल आनंद
बीजेपी नेता निखिल आनंद ने एक विस्तृत बयान जारी करते हुए कहा कि नीट पेपर लीक का मुद्दा सिर्फ एक बहाना था, जबकि असल मकसद देश की चुनी हुई सरकार और पिछड़े समाज के नेतृत्व को कमजोर करना था।
"नीट पेपर लीक को लेकर आंदोलन तो सिर्फ एक बहाना था, हकीकत में भारत के ओबीसी समाज से आने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही असली निशाना हैं। फिलहाल एक ओबीसी समाज के ही कर्मठ शिक्षा मंत्री की बलि चढ़ी है। देश की जनता को इस शातिर राजनीति को समझना होगा।" — डॉ. निखिल आनंद, राष्ट्रीय महामंत्री (BJP ओबीसी मोर्चा)
निखिल आनंद ने विपक्ष पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा:
विपक्ष का छिपा हुआ एजेंडा: देखने और सुनने में भले ही सवाल शिक्षा व्यवस्था का उठाया गया था, लेकिन इसके पीछे का वास्तविक मकसद राष्ट्रवाद-विरोधी और सनातन-हिंदू विरोधी राजनीति को स्थापित करना है।
शाहीन बाग का एक्सटेंशन: उन्होंने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर CJP का यह प्रदर्शन CAA-NRC के खिलाफ हुए शाहीन बाग और सीमाओं पर हुए किसान आंदोलन का ही 'तीसरा चरण' था।
विपक्षी गठजोड़ पर निशाना: इस राजनीति में वामपंथी दलों, आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और पूरा 'INDIA' गठबंधन पूरी तरह से शामिल था। उन्होंने कहा कि जो लोग सड़कों पर लोकतंत्र की बात करते हैं, वही संसद के भीतर किसी भी स्वस्थ चर्चा से भागते रहे हैं।
"धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा अत्यंत दुखदायी": रामकृपाल यादव
दूसरी तरफ, बिहार सरकार में मंत्री और वरिष्ठ नेता रामकृपाल यादव ने धर्मेंद्र प्रधान के पद छोड़ने पर गहरा अफसोस जताया है।
मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, "धर्मेंद्र प्रधान जी का इस्तीफा बेहद दुखदायी है। उन्होंने देश और शिक्षा क्षेत्र को बहुत कुछ दिया है। राष्ट्र हित और विद्यार्थियों के भविष्य के लिए उन्होंने हर स्तर पर मुस्तैदी से प्रयास किया। आज उनका शिक्षा मंत्री के पद पर न रहना हम सभी के लिए दुखद है।"
राजनीतिक विभाजन गहराया
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद एक तरफ जहां कांग्रेस, CJP और विपक्ष इसे 'छात्रों और लोकतंत्र की जीत' बता रहे हैं, वहीं बीजेपी नेताओं के इन बयानों से साफ है कि सत्ता पक्ष इस आंदोलन के पीछे विपक्षी दलों के राजनीतिक एजेंडे और साजिश को देख रहा है।





