चंडीगढ़: देश के प्रतिष्ठित औद्योगिक घरानों में से एक 'ट्राइडेंट ग्रुप' और पंजाब सरकार के बीच कानूनी जंग छिड़ गई है। कंपनी द्वारा पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) पर राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाने के बाद, पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सोमवार (4 मई) तक कंपनी के खिलाफ किसी भी कठोर कार्रवाई पर रोक लगा दी है।

राजनीतिक पाला बदलने से जुड़ी कार्रवाई?

ट्राइडेंट ग्रुप ने अपनी याचिका में सनसनीखेज आरोप लगाया है कि यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है। कंपनी के अनुसार, उनके संस्थापक और राज्यसभा सांसद राजिंदर गुप्ता ने 24 अप्रैल 2026 को अपना राजनीतिक दल बदला था। याचिका में दावा किया गया है कि इस दल-बदल के तुरंत बाद कंपनी प्रबंधन और कर्मचारियों को धमकियां मिलने लगीं और प्रदूषण बोर्ड ने अचानक 'असामान्य' सक्रियता दिखाई।

'छापामार शैली' में निरीक्षण पर उठाए सवाल

अदालत को दी गई जानकारी के मुताबिक, गुरुवार रात करीब 7:30 बजे पीपीसीबी की 30 सदस्यीय टीम ने फैक्ट्री परिसर में प्रवेश किया। कंपनी का आरोप है कि:

यह कार्रवाई एक नियमित निरीक्षण के बजाय 'छापामार शैली' में की गई।

नमूना संग्रह (Sample Collection) की वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

नियमों के विपरीत, लिए गए नमूनों की एक प्रति उद्योग प्रबंधन को नहीं सौंपी गई।

केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग

ट्राइडेंट ग्रुप ने अदालत से आग्रह किया है कि लिए गए नमूनों की जांच पंजाब से बाहर किसी केंद्रीय एजेंसी द्वारा कराई जाए, क्योंकि उन्हें वर्तमान राज्य मशीनरी की निष्पक्षता पर भरोसा नहीं है। कंपनी ने स्पष्ट किया कि वे पिछले तीन दशकों से सभी पर्यावरणीय मानकों का पालन कर रहे हैं और 15 हजार परिवारों को रोजगार दे रहे हैं।

पीपीसीबी की सफाई और कोर्ट का रुख

दूसरी ओर, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अदालत में इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह केवल एक नियमित निरीक्षण था। बोर्ड ने आश्वासन दिया कि फिलहाल फैक्ट्री को बंद करने या कोई दंडात्मक कार्रवाई करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

"अदालत ने पीपीसीबी के बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए सोमवार तक किसी भी कठोर कार्रवाई पर रोक लगा दी है। यदि उद्योग की आशंकाएं तथ्यों के आधार पर सही पाई गईं, तो प्रशासनिक निष्पक्षता की न्यायिक जांच की जाएगी।" — पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट (खंडपीठ)

आगे क्या?

हाई कोर्ट ने मामले में औपचारिक नोटिस जारी कर दिया है और अगली सुनवाई सोमवार के लिए सूचीबद्ध की है। यह मामला अब केवल औद्योगिक प्रदूषण तक सीमित न रहकर राजनीतिक और प्रशासनिक निष्पक्षता के एक बड़े विवाद में बदल गया है।