हरदोई / लखनऊ: उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के एक विधायक का चुनाव जीतने को लेकर दिया गया अजीबोगरीब और बेबाक बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। हरदोई की गोपामऊ विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक श्याम प्रकाश ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए दावा किया है कि चुनाव सिर्फ विकास कार्यों के दम पर नहीं, बल्कि ‘तिकड़म’ से जीते जाते हैं। विधायक ने लोकतंत्र में जीत के स्थापित पैमानों को दरकिनार करते हुए ग्राम प्रधानों को जीत हासिल करने के लिए हर संभव हथकंडा अपनाने की खुली सलाह दे डाली।

'जहाँ सड़कें बनवाईं, वहाँ से भी नहीं मिले वोट'

अपने इस अनोखे दावे के पीछे विधायक श्याम प्रकाश ने अपना खुद का व्यावहारिक अनुभव (प्रैक्टिकल बात) साझा किया। उन्होंने जनता के बीच खुलकर कहा:

"चुनाव विकास से नहीं जीते जाते, विकास की वजह से वोट नहीं मिलते। मैंने भी अपने क्षेत्र में खूब विकास किया है। लेकिन सच तो यह है कि जिन गाँवों में मैंने पक्की सड़कें बनवाईं, उन्हीं बूथों से मुझे वोट नहीं मिले। मैं आपको बिल्कुल प्रैक्टिकल बात बता रहा हूँ।"

ग्राम प्रधानों को जीत का 'अनोखा' नुस्खा

बीजेपी विधायक का यह संबोधन उस समय सामने आया जब उत्तर प्रदेश सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के टलने की स्थिति में निवर्तमान ग्राम प्रधानों को ही ग्राम पंचायतों का प्रशासक नियुक्त करने का ऐतिहासिक फैसला किया है। इसी का हवाला देते हुए विधायक ने आगामी पंचायत चुनाव की तैयारी कर रहे गांव के मुखियाओं (प्रधानों) को जीत का मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि अगले चुनाव में जीत दर्ज करने के लिए वे ‘साम’, ‘दाम’, ‘दंड’ और ‘भेद’ जैसी सभी नीतियों का खुलकर इस्तेमाल करें और जितने भी संभावित तरीके हो सकते हैं, उन सबको आजमाएं।

26 मई को खत्म हो रहा है पंचायतों का कार्यकाल

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की मौजूदा ग्राम पंचायतों का कार्यकाल इसी महीने 26 मई को समाप्त होने जा रहा है। राज्य सरकार के नए नियमों के मुताबिक, नई ग्राम पंचायतों के विधिवत गठन होने तक या अधिकतम छह महीने की अवधि तक निवर्तमान प्रधान ही प्रशासक के रूप में पंचायतों के सामान्य और प्रशासनिक कामकाज संभालते रहेंगे। इसी पृष्ठभूमि में अपनी जमीन मजबूत करने जुटे प्रधानों को विधायक की यह 'साम-दाम' वाली नसीहत अब सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक खूब सुर्खियां बटोर रही है।