नई दिल्ली:
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थकों द्वारा आयोजित 'संसद चलो अभियान' के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुए लाठीचार्ज ने देश के सियासी पारे को गरमा दिया है। इस घटना के बाद समूचे विपक्ष ने एकजुट होकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। नीट (NEET) परीक्षा में कथित धांधली, लगातार होते पेपर लीक और युवाओं के उत्पीड़न के मुद्दे पर विपक्षी नेताओं ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया है।
'लीक करने वाले आजाद, हक मांगने वाले पिट रहे' — राहुल गांधी
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा:
युवा-विरोधी रुख: "प्रधानमंत्री मोदी भारत के इतिहास के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री हैं। वह इतने युवा-विरोधी हैं कि एक नाकाम शिक्षा मंत्री का इस्तीफा तक नहीं ले सकते।"
आंकड़ों से घेरा: राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश में अब तक 152 पेपर लीक हो चुके हैं, जिससे लगभग 7.5 करोड़ छात्र पीड़ित हैं। लेकिन हैरानी की बात है कि सजा एक भी दोषी को नहीं मिली।
छात्रों का दमन: उन्होंने आगे कहा, "सजा किसे मिली? सिर्फ मेहनती युवाओं को। जब इन बच्चों ने शिक्षा से जुड़े अपने जायज सवाल उठाए, तो जवाब में उन्हें लाठियाँ और हिरासत मिली। लीक करने वाले अपराधी आजाद घूम रहे हैं, जबकि वाजिब मुद्दे उठाने वाले छात्रों को घसीटा और पीटा जा रहा है। यह सरकार सिर्फ युवाओं को नाकाम नहीं कर रही, बल्कि उनपर टूट पड़ी है।"
'निराशा का पानी जब समुंदर बनता है, तब इंकलाब आता है' — अखिलेश यादव
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने लाठीचार्ज में घायल हुए युवाओं के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए इसे सरकार की सबसे बड़ी विफलता करार दिया। शायराना अंदाज में सरकार पर तंज कसते हुए उन्होंने लिखा:
"निराशा में आंख का पानी जब समुंदर बन जाता है, इंकलाब तब आता है!!!
कोई अपनी ताकत पर, जब सर उठा इठलाता है, इंकलाब तब आता है!"
अखिलेश यादव ने नीट परीक्षा के आयोजन पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार एक परीक्षा तक ठीक से आयोजित नहीं करा पा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा में हुई इस महा-धांधली के पीछे सत्ताधारी दल से जुड़े लोगों का हाथ है।
'अहिंसक विरोध पर लाठी चलाना सरकार की हिंसा' — शशि थरूर
कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद शशि थरूर ने भी इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने लाठीचार्ज के पीछे के तर्क पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब विरोध पूरी तरह से शांतिपूर्ण और अहिंसक था, तो बल प्रयोग करने की क्या आवश्यकता थी? थरूर ने कहा, "लाठीचार्ज बिना हिंसा के होने वाला काम नहीं है; यह खुद में एक हिंसा है। मुझे सरकार का यह लॉजिक समझ नहीं आता।"
संसद में चर्चा से क्यों भाग रही सरकार?
शशि थरूर ने संसद के भीतर के गतिरोध का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्ष लंबे समय से देश के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की मांग कर रहा है।
| विपक्ष के मुख्य मुद्दे | विपक्ष का रुख |
|---|---|
| NEET परीक्षा और पेपर लीक | छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मामला, जिस पर तुरंत बहस जरूरी है। |
| अयोध्या में चंदे की हेराफेरी | पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए सदन में चर्चा हो। |
थरूर ने कहा, "हमारी मांग सिर्फ इतनी थी कि इन मुद्दों पर संसद में बात हो। सरकार के पास भारी बहुमत है, फिर वे चर्चा से इतना डर क्यों रहे हैं? संसद का मकसद ही देश की आवाज सुनना है। लेकिन जब सरकार विपक्ष को अनसुना कर सिर्फ अपने एजेंडे पर अड़ी रहती है, तो आक्रोश स्वाभाविक है।"
ब्यूरो रिपोर्ट, नई दिल्ली।





