बेंगलुरु। देशभर में NEET पेपर लीक का विवाद अभी थमा भी नहीं था कि 21 जून को आयोजित 'री-टेस्ट' (Re-Test) ने एक नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है। एक तरफ जहां पूरे देश में कड़ी सुरक्षा के बीच परीक्षा आयोजित की गई, तो वहीं कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु की सड़कों पर छात्रों के सपनों और राजनीति के बीच सीधी टक्कर देखने को मिली।

डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले छात्र और उनके बेबस माता-पिता ट्रैफिक जाम में फंसे रहे, और जब वे परीक्षा केंद्र पहुंचे तो दरवाजे बंद हो चुके थे। इस हृदय विदारक घटना ने एक बार फिर देश में 'NEET' और 'राजनीति' को आमने-सामने ला खड़ा किया है।

क्या है पूरा घटनाक्रम: जाम में फंसा 22 लाख छात्रों का भविष्य

21 जून को देशभर में NEET-UG का री-टेस्ट था, जिसमें करीब 22 लाख छात्र बैठ रहे थे। परीक्षा दोपहर 2 बजे शुरू होनी थी और छात्रों को 1:30 बजे तक केंद्र पर पहुंचना अनिवार्य था।

दर्दनाक मंजर: इसी दौरान बेंगलुरु शहर के बीचों-बीच सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी की एक विशाल रैली चल रही थी। इस रैली के कारण सड़कों पर भारी ट्रैफिक जाम लग गया। गाड़ियां टस से मस नहीं हो रही थीं। समय निकलता देख घबराए माता-पिता को अपने दोपहिया वाहन फुटपाथ पर दौड़ाने पड़े।

इस भारी अफरा-तफरी के बीच कम से कम तीन छात्र परीक्षा केंद्र पर देरी से पहुंचे।

नियमों के तहत गेट बंद किए जा चुके थे।

रोते-बिलखते छात्रों ने अंदर जाने के लिए गेट पर चढ़ने की कोशिश भी की, लेकिन उन्हें एंट्री नहीं मिली।

महीनों की कड़ी मेहनत महज कुछ मिनटों की देरी और एक राजनीतिक रैली की भेंट चढ़ गई।

माता-पिता का फूटा गुस्सा: "कोटा जाने वाले राहुल अब कहां हैं?"

जब बच्चों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं मिला, तो बेबस माता-पिता का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने सीधे तौर पर कांग्रेस की रैली को इसका जिम्मेदार ठहराया:

7 किमी का सफर बनी आफत: एक छात्र के पिता कृष्ण मूर्ति ने बताया कि जो रास्ता आम तौर पर 20 मिनट में तय हो जाता है, उसमें 35 मिनट से ज्यादा लग गए। पुलिस की डांट के बावजूद उन्हें फुटपाथ पर गाड़ी चलानी पड़ी।

राहुल गांधी से सवाल: एक अन्य नाराज पिता ने सवाल उठाया कि राहुल गांधी छात्रों के हक के लिए कोटा (राजस्थान) जाते हैं, लेकिन आज उनकी पार्टी की रैली की वजह से बच्चों का भविष्य दांव पर लग गया, इसका जवाब कौन देगा?

गलत समय: माता-पिता का सीधा आरोप था कि जब पूरा देश जानता था कि 21 जून को NEET का री-टेस्ट है, तो उसी दिन सड़क को 3 घंटे तक ब्लॉक करके रैली क्यों की गई?

सियासी घमासान: आमने-सामने भाजपा और कांग्रेस

इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही कर्नाटक की राजनीति में भूचाल आ गया। दोनों ही प्रमुख दल इस मुद्दे पर आक्रामक नजर आ रहे हैं:

राजनीतिक दलप्रमुख बयान और तर्क
भाजपा (हमला)सांसद तेजस्वी सूर्या और सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर सत्ता की भूख और राजनीति को छात्रों के भविष्य से ऊपर रखने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि रैली का समय या स्थान बदला जा सकता था।
कांग्रेस (पलटवार)मंत्री प्रियंक खरगे ने इसे 'ड्रामा' बताते हुए भाजपा को पिछले 10 सालों में हुए 89 पेपर लीक की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि छात्र सिर्फ बेंगलुरु में नहीं, बल्कि भाजपा शासित राज्यों में भी लेट हुए हैं।
कांग्रेस की सफाईखरगे ने स्पष्ट किया कि बेंगलुरु में जो 3 छात्र छूटे, उनमें से एक पुरानी हॉल टिकट लाया था और अन्य निजी कारणों से लेट थे। सरकार ने बाकायदा ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की थी।

इसके अलावा कांग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद ने छात्रों को हुई परेशानी पर दुख जताते हुए भाजपा पर निशाना साधा और पूछा कि NEET के तनाव के कारण जिन छात्रों ने आत्महत्या की है, क्या उसके लिए भाजपा ने कभी देश से माफी मांगी है?

इस आरोप-प्रत्यारोप के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि राजनीतिक व्यवस्थाओं की कीमत आखिर कब तक देश के होनहार छात्रों को चुकानी पड़ेगी?