नई दिल्ली: NEET-UG पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद देश की सियासत पूरी तरह गरमा गई है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने इसे छात्रों, युवाओं और एकजुट विपक्ष की ऐतिहासिक जीत करार दिया है।

इस्तीफे के तुरंत बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए प्रधानमंत्री से देश के युवाओं से सार्वजनिक तौर पर माफी मांगने की मांग की है।

"भ्रष्ट सिस्टम के खिलाफ करोड़ों युवाओं की जीत": खरगे

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए लिखा कि यह जीत भारत के करोड़ों युवाओं के संघर्ष और साझा विपक्ष की चट्टानी एकजुटता का परिणाम है।

"भारत के छात्रों की गूंज आखिरकार अहंकारी सत्ता की दहलीज तक पहुंच गई। यह हमारे करोड़ों युवाओं की जीत है, जिन्होंने देशभर में शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सड़कों पर आवाज उठाई। यह सत्य की जीत है और पीएम मोदी के हठ की हार है।" — मल्लिकार्जुन खरगे, राष्ट्रीय अध्यक्ष (कांग्रेस)

खरगे ने आगे कहा कि आंदोलनकारी छात्रों और युवाओं पर लाठी-डंडे और पैलेट गन चलाने वाले अधिकारियों के खिलाफ तुरंत और कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा जंतर-मंतर पर आंदोलन समाप्ति की घोषणा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के तुरंत बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। राहुल गांधी ने CJP आंदोलन की सफलता को देश के छात्रों की ऐतिहासिक जीत करार दिया और निवर्तमान शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का स्वागत किया।

हालाँकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल एक मंत्री के पद छोड़ने से शिक्षा व्यवस्था में फैला भ्रष्टाचार और संकट खत्म नहीं होगा।

"दुनिया में शान रही हमारी शिक्षा प्रणाली पर हुआ वैचारिक कब्जा": राहुल गांधी

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जो भारतीय शिक्षा प्रणाली कभी पूरी दुनिया में अपनी गुणवत्ता के लिए जानी जाती थी, उसे पिछले कुछ वर्षों में व्यवस्थित तरीके से बर्बाद किया गया है।

"यह देश के छात्रों की जीत है और अपनी शिक्षा प्रणाली को बचाने की एक बड़ी जन-प्रतिक्रिया है। जो शिक्षा व्यवस्था भारत की शान हुआ करती थी, उस पर पिछले कुछ वर्षों से लगातार हमले हो रहे हैं। इसका अंधाधुंध व्यवसायीकरण किया गया है और इस पर वैचारिक कब्जा जमाने की कोशिश की गई है।" — राहुल गांधी, कांग्रेस नेता

राहुल ने धर्मेंद्र प्रधान को प्रशासनिक नाकामी, भ्रष्टाचार और शिक्षा व्यवस्था के विनाश का 'प्रतीक' बताते हुए कहा कि उनका हटना सही कदम है, लेकिन असल समस्या व्यवस्था के अंदर फैले खोखलेपन की है।

Rahul Gandhi की 3 प्रमुख मांगें:

PM मोदी देश से माफी मांगें: राहुल गांधी ने कहा कि लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने के लिए मुख्य सूत्रधार के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के छात्रों से सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी चाहिए।

हिंसा के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई: जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठीचार्ज व अत्याचार करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त, निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई की जाए।

गृह मंत्री की जवाबदेही: राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान छात्रों पर हुई हिंसा और पुलिसिया कार्रवाई के लिए गृह मंत्री अमित शाह सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं।

RSS और सरकार पर साधा निशाना

राहुल गांधी ने आगे कहा कि RSS द्वारा देश के शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों और विश्वविद्यालयों को नियंत्रित करना एक अत्यंत गंभीर मुद्दा है। इसके लिए सिर्फ प्रधानमंत्री ही नहीं, बल्कि संघ का ढांचा भी पूरी तरह जिम्मेदार है। उन्होंने मांग की कि पूरी शिक्षा प्रणाली को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए सरकार को तात्कालिक के साथ-साथ कड़े और बुनियादी सुधारात्मक कदम उठाने होंगे।

जयराम रमेश का सवाल: "इस्तीफे के बाद भी 'पेपर लीक' शब्द स्वीकारने से क्यों कतराते रहे मंत्री?"

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी एक्स पर पोस्ट कर प्रधानमंत्री और पूर्व शिक्षा मंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि युवाओं के लगातार बढ़ते दबाव के कारण ही प्रधानमंत्री को धर्मेंद्र प्रधान को 'पॉलिटिकल कवर' देना बंद करना पड़ा।

जयराम रमेश ने तर्क दिया कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा बेहद आवश्यक था, क्योंकि:

लीक शब्द से परहेज: धर्मेंद्र प्रधान ने शुरुआत से लेकर अपने त्यागपत्र तक, कभी भी 'पेपर लीक' शब्द को स्वीकार नहीं किया और इसे केवल "अनियमितता" बताते रहे।

संसदीय समिति को गुमराह करने का आरोप: शिक्षा मंत्रालय ने संसदीय स्थायी समिति के सामने भी आधिकारिक रूप से पेपर लीक से इनकार किया था।

जवाबदेही का अभाव: रमेश ने कहा कि जब मंत्री यह मानने को ही तैयार नहीं थे कि गड़बड़ी कहां हुई, तो उनसे किसी निष्पक्ष जांच या जवाबदेही की उम्मीद नहीं की जा सकती थी।

विपक्ष ने तेज की हमले की धार

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष ने छात्रों के आंदोलन और उनके अधिकारों की लड़ाई की पहली बड़ी सफलता बताया है। पार्टी का कहना है कि वे तब तक शांत नहीं बैठेंगे जब तक पूरी परीक्षा प्रणाली पारदर्शी नहीं हो जाती और पीड़ितों को न्याय नहीं मिल जाता।