कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य प्रशासन और चुनाव आयोग के बीच टकराव चरम पर पहुंच गया है। राज्य के 50 से अधिक शीर्ष अधिकारियों (IAS और IPS) के अचानक किए गए तबादलों ने एक बड़े राजनीतिक और कानूनी विवाद को जन्म दे दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कड़ी आपत्ति के बाद अब यह मामला कलकत्ता हाई कोर्ट की दहलीज पर है।
रविवार से गुरुवार तक 'ऑपरेशन क्लीनअप'
चुनाव आयोग ने रविवार आधी रात से कार्रवाई शुरू की, जो गुरुवार रात तक जारी रही। इस दौरान प्रशासन के सबसे महत्वपूर्ण पदों पर गाज गिरी:
शीर्ष पद: मुख्य सचिव (Chief Secretary), गृह सचिव (Home Secretary), राज्य पुलिस महानिदेशक (DG) और कोलकाता पुलिस कमिश्नर को उनके पदों से हटा दिया गया है।
जिला स्तर: कई जिलों के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM) और पुलिस कप्तानों का भी तबादला किया गया है।
कड़ा निर्देश: आयोग ने साफ किया है कि हटाए गए अधिकारी फिलहाल बंगाल में चुनाव से जुड़े किसी भी कार्य में शामिल नहीं हो सकेंगे। इनमें से कई को दूसरे राज्यों में 'ऑब्जर्वर' बनाकर भेज दिया गया है।
ममता बनर्जी का प्रहार: "आयोग होगा जिम्मेदार"
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर इस कदम को 'अनुचित' और 'एकतरफा' बताया है। ममता ने सार्वजनिक मंच से चेतावनी देते हुए कहा:
"यदि अधिकारियों को हटाने के कारण राज्य की कानून-व्यवस्था में कोई चूक होती है या कोई अप्रिय घटना घटती है, तो इसके लिए पूरी तरह से चुनाव आयोग जिम्मेदार होगा।"
हाई कोर्ट में 'पावर गेम': अगले हफ्ते सुनवाई
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ वकील और नेता कल्याण बनर्जी ने इस मामले को कलकत्ता हाई कोर्ट के समक्ष उठाया है। याचिकाकर्ता की मुख्य दलीलें इस प्रकार हैं:
अधिकार क्षेत्र: चुनाव आयोग को राज्य के अधिकारियों को दूसरे राज्यों में भेजने का कानूनी अधिकार नहीं है।
प्रशासनिक संकट: इतने बड़े स्तर पर तबादलों से राज्य का प्रशासनिक ढांचा चरमरा गया है और सरकारी कामकाज में रुकावट आ रही है।
चीफ जस्टिस सुजॉय पाल और जस्टिस पार्थसारथी सेन की डिवीजन बेंच ने जनहित याचिका (PIL) दायर करने की अनुमति दे दी है। इस मामले की विस्तृत सुनवाई अगले हफ्ते होनी तय है।
सियासी मायने
सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस इसे केंद्र के इशारे पर की गई कार्रवाई बता रही है, जबकि चुनाव आयोग का तर्क है कि 'निष्पक्ष और पारदर्शी' चुनाव सुनिश्चित करने के लिए लंबे समय से जमे हुए अधिकारियों का तबादला जरूरी था। अब सबकी नजरें हाई कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, जो बंगाल चुनाव की दिशा तय कर सकता है।





