नई दिल्ली | विशेष संवाददाता संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण का पहला दिन पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष की भेंट चढ़ गया। लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध को लेकर भारी हंगामा हुआ। जहाँ विपक्ष ने 'We Want Discussion' के नारों के साथ चर्चा की मांग की, वहीं विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने क्षेत्र में फंसे भारतीयों की सुरक्षा और आसन्न ऊर्जा संकट पर सरकार की तैयारियों का ब्यौरा पेश किया।
सदन में गतिरोध: वॉकआउट और नारेबाजी
राज्यसभा में विदेश मंत्री के वक्तव्य के दौरान विपक्ष ने असंतोष जताते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। उधर, लोकसभा में भी स्थिति तनावपूर्ण रही। स्पीकर ओम बिरला को हटाने के प्रस्ताव और युद्ध पर चर्चा की मांग को लेकर विपक्षी सांसदों ने विदेश मंत्री के संबोधन में बाधा डाली। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए कहा कि हम हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार हैं।
विदेश मंत्री के संबोधन की 5 बड़ी बातें
विदेश मंत्री ने पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालात और भारत पर इसके प्रभाव को लेकर पांच महत्वपूर्ण बिंदु साझा किए:
विशाल भारतीय समुदाय की सुरक्षा: खाड़ी देशों में लगभग 1 करोड़ भारतीय रहते हैं। ईरान में भी हजारों छात्र और कर्मचारी मौजूद हैं। सरकार की प्राथमिकता उनकी सुरक्षित घर वापसी है। अब तक 67,000 नागरिक अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर चुके हैं।
ईरान नेतृत्व से संपर्क में बाधा: जयशंकर ने स्वीकार किया कि ईरान में शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर कई मौतों और बुनियादी ढांचे की तबाही के कारण फिलहाल वहां की लीडरशिप से संपर्क करना अत्यंत कठिन हो गया है।
ऊर्जा सुरक्षा पर संकट: यह क्षेत्र भारत की ऊर्जा आपूर्ति (तेल और गैस) का मुख्य स्रोत है। सप्लाई चेन में किसी भी तरह की रुकावट भारत की अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
भारतीय नाविकों की क्षति: इस युद्ध की आंच भारतीय नागरिकों तक पहुँच चुकी है। भारत ने अपने दो नाविकों को खो दिया है, जबकि एक अब भी लापता है। शिपिंग डायरेक्टरेट जनरल ने नाविकों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है।
बढ़ता युद्ध क्षेत्र: संघर्ष अब केवल इजरायल और ईरान तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य खाड़ी देशों में भी फैल गया है, जिससे तबाही और मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।
भारत की कूटनीतिक भूमिका और मानवीय मदद
चुनौतियों के बावजूद भारत ने मानवीय दृष्टिकोण बनाए रखा है। विदेश मंत्री ने बताया कि ईरान के विदेश मंत्री ने भारतीय बंदरगाह कोच्चि पर ईरानी युद्धपोत 'लावन' को डॉक करने की अनुमति देने के लिए भारत का आभार व्यक्त किया है।
निष्कर्ष: सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह युद्ध के पक्ष में नहीं है और 'संवाद व कूटनीति' के जरिए शांति बहाली का समर्थन करती है। हालांकि, विपक्ष इस मुद्दे पर सदन में विस्तृत और औपचारिक चर्चा पर अड़ा हुआ है।





