कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों से पहले सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। नेता प्रतिपक्ष और भवानीपुर से भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी ने मतगणना प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि मतगणना ड्यूटी में तैनात अधिकारी अपनी गोपनीय जानकारी लीक कर रहे हैं, जिससे सोमवार को होने वाली काउंटिंग प्रभावित हो सकती है।

'एक्स' पर साझा किए सबूत: "सफेदपोश संगठनों का दबाव"

शुभेंदु अधिकारी ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर सनसनीखेज पोस्ट करते हुए कुछ व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट साझा किए। उनके मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं:

डेटा शेयरिंग: काउंटिंग ड्यूटी पर तैनात कई अधिकारी स्वेच्छा से या दबाव में आकर अपनी ड्यूटी का स्थान, पदनाम और विशिष्ट भूमिकाओं का विवरण विभागीय संगठनों और एसोसिएशनों को भेज रहे हैं।

स्प्रेडशीट का खेल: अधिकारी का दावा है कि बाकायदा कुछ 'स्प्रेडशीट' और सूचियां प्रसारित की जा रही हैं, जिनमें चुनाव ड्यूटी की संवेदनशील जानकारी भरी जा रही है।

गोपनीयता का उल्लंघन: शुभेंदु ने कहा कि मतगणना प्रक्रिया की विश्वसनीयता तभी बनी रहती है जब कर्मियों की तैनाती गोपनीय रहे। विवरण लीक होने से इन अधिकारियों पर राजनीतिक प्रभाव और धमकी की गुंजाइश बढ़ जाती है।

चुनाव आयोग से सख्त कार्रवाई की मांग

भाजपा नेता ने इस मामले को लेकर चुनाव आयोग (EC) और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को पत्र लिखकर तत्काल दखल देने की अपील की है। उन्होंने अपनी शिकायत में प्रमुख रूप से तीन मांगें रखी हैं:

कठोर निर्देश: अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं कि वे अपनी ड्यूटी की जानकारी किसी भी संगठन या संघ के साथ साझा न करें।

जांच के आदेश: उन संगठनों और एसोसिएशनों की जांच की जाए जो इस तरह का डेटा इकट्ठा कर रहे हैं।

पारदर्शिता की रक्षा: मतगणना के दौरान किसी भी बाहरी हस्तक्षेप या राजनीतिक दबाव को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएं।

मतगणना की निष्पक्षता पर सवाल

शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि यदि किसी अधिकारी की विशिष्ट तैनाती का विवरण राजनीतिक झुकाव वाले संगठनों को पहले से पता चल जाता है, तो यह चुनाव संबंधी नियमों का गंभीर उल्लंघन है। इससे न केवल पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता खतरे में आती है, बल्कि परिणामों की निष्पक्षता पर भी सवाल उठते हैं।

सोमवार को होने वाली मतगणना से ठीक पहले इन आरोपों ने राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। अब सभी की निगाहें चुनाव आयोग के अगले कदम पर टिकी हैं।