नई दिल्ली: भारतीय विदेश व्यापार और निर्यात के परिदृश्य में एक बड़ा रणनीतिक बदलाव देखने को मिल रहा है। कभी अपने वस्तु निर्यात (Goods Export) के लिए मुख्य रूप से अमेरिका और यूरोपीय देशों पर निर्भर रहने वाला भारत अब अफ्रीका और आसियान (ASEAN) देशों के बाजारों में तेजी से अपने कदम जमा रहा है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 में अफ्रीकी महाद्वीप में भारत का निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ा है, जिससे वहां दशकों से चले आ रहे चीनी आधिपत्य और प्रभुत्व को सीधी चुनौती मिल रही है।

अफ्रीकी देशों में भारतीय सामान की भारी मांग

अफ़्रीकी महाद्वीप में चीन फिलहाल 53 देशों को सालाना लगभग 225 अरब डॉलर का निर्यात करता है, जिसमें दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया और मिस्र उसके मुख्य खरीदार रहे हैं। हालांकि, अब इन देशों में भारतीय वस्तुओं जैसे—इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और उपभोक्ता सामानों की मांग में जबरदस्त उछाल आया है।

  • दक्षिण अफ्रीका: चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में दक्षिण अफ्रीका को होने वाले भारतीय निर्यात में 51 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। भारत के कुल वैश्विक निर्यात में अब दक्षिण अफ्रीका की हिस्सेदारी 2.2 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
  • मिस्र (Egypt): मिस्र को किए जाने वाले भारतीय निर्यात में रिकॉर्ड 72 प्रतिशत का इजाफा देखने को मिला है।
  • नाइजीरिया: नाइजीरिया में भारतीय निर्यात 19.6 प्रतिशत बढ़ा है।
  • इसके अलावा केन्या, तंजानिया और कई अन्य अफ्रीकी देशों में भी भारतीय सामानों की पहुंच और हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है।

आसियान देशों में निर्यात 56% बढ़ा; कुल आंकड़ों में उछाल

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार:

  • अफ्रीका में 47% का उछाल: चालू वित्त वर्ष 2026-27 के पहले पांच महीनों (अप्रैल-अगस्त) में अफ्रीकी देशों को भारत का निर्यात 47 प्रतिशत बढ़कर 26.19 अरब डॉलर पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 17.83 अरब डॉलर था।
  • आसियान में 56% की वृद्धि: चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में आसियान (ASEAN) देशों में भारतीय निर्यात में पिछले साल के मुकाबले 56 प्रतिशत का शानदार इजाफा दर्ज हुआ है।
  • यूरोपीय यूनियन की सुस्ती के बावजूद बढ़त: यूरोपीय यूनियन (EU) को होने वाले निर्यात में महज 4% की बढ़ोतरी के बावजूद, अफ्रीका और आसियान के शानदार प्रदर्शन की बदौलत भारत का कुल निर्यात दोहरे अंकों (Double Digits) में वृद्धि दर्ज कर रहा है।

इसे भी पढ़ेंः अमेरिका का कड़ा एक्शन: ईरान की फंडिंग रोकने के लिए मुंबई की 2 कंपनियों और 5 भारतीयों पर प्रतिबंध

क्यों आ रहा है यह बदलाव?

  1. आर्थिक वृद्धि और बढ़ती मांग: अफ्रीका के कई विकासशील देशों की औसतन विकास दर 4% के आसपास बनी हुई है, जिससे वहां उपभोक्ता वस्तुओं की मांग में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है।
  2. नीतिगत सुधार और आसान भुगतान प्रक्रिया: निर्यातकों के अनुसार, पहले अफ़्रीकी देशों में शिपमेंट भेजने और भुगतान (Payment Security) को लेकर मन में कई आशंकाएं रहती थीं। लेकिन केंद्र सरकार के नीतिगत सुधारों, बेहतर लॉजिस्टिक्स और सुगम व्यापारिक नीतियों के कारण अब भारतीय निर्यातक बिना किसी डर के वहां चीनी सामानों का खुलकर मुकाबला कर रहे हैं।

#IndianExports #TradeNews #IndiaAfricaTrade #ASEAN #ChinaVsIndia #GlobalTrade #IndianEconomy #CommerceMinistry #MakeInIndia