नई दिल्ली/चंडीगढ़: आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इस बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय महासचिव और पंजाब प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया ने स्पष्ट किया है कि पार्टी चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है। अकाली दल के साथ संभावित गठबंधन के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस पर अंतिम फैसला पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा, लेकिन फिलहाल बीजेपी राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह तत्पर है।

तीनों दलों पर साधा निशाना, कहा जनता त्रस्त

डॉ. सतीश पूनिया ने पंजाब के राजनीतिक दलों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि राज्य की जनता कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल (SAD) और आम आदमी पार्टी (AAP)—तीनों प्रमुख दलों को सरकार बनाने का मौका दे चुकी है, लेकिन इनमें से कोई भी पार्टी जनता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी। उन्होंने दावा किया कि पंजाब में मौजूदा सरकार और पुरानी पार्टियों के खिलाफ जबरदस्त 'एंटी-इन्कम्बेंसी' (सरकार विरोधी लहर) है, जिसका सीधा फायदा इस बार बीजेपी को मिलने जा रहा है। राज्य की जनता अब बीजेपी को एक मजबूत और भरोसेमंद विकल्प के रूप में देख रही है।

बीजेपी ने तय किए तीन प्रमुख चुनावी मुद्दे

पूनिया के मुताबिक, आगामी चुनाव के लिए बीजेपी ने मुख्य रूप से तीन बड़े मुद्दों को एजेंडे में रखा है:

  1. नशा (Drug Menace): केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पंजाब और देश को नशामुक्त बनाने का संकल्प लिया है, और जनता को इस राष्ट्रीय अभियान पर पूरा भरोसा है।
  2. कानून व्यवस्था (Law and Order): राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को सुधारना पार्टी की प्राथमिकता है।
  3. भ्रष्टाचार (Corruption): पारदर्शी और जवाबदेह शासन व्यवस्था देना।

अकाली दल के साथ पिछले चुनावों में हुए 23 सीटों के समझौते के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि गठबंधन को लेकर अभी कोई आधिकारिक बातचीत नहीं हुई है। ऐसी किसी भी चर्चा पर बात तभी आगे बढ़ेगी जब शीर्ष नेतृत्व स्तर पर कोई ठोस पहल होगी, और फिलहाल पार्टी सभी 117 सीटों की तैयारियों पर फोकस कर रही है।

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गांधी परिवार और विपक्ष पर भी बोला हमला

प्रेसवार्ता के दौरान डॉ. पूनिया ने कांग्रेस नेतृत्व पर भी तीखे प्रहार किए। प्रियंका गांधी के बेटे रेहान वाड्रा की प्रदर्शनी से जुड़े विवाद पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि नेहरू-गांधी परिवार का ‘लॉन्चिंग पैड’ अब पूरी तरह खराब हो चुका है। इसके अलावा, उन्होंने 1 नवंबर को विपक्षी दलों की प्रस्तावित रैली की तारीख पर भी सवाल उठाए। पूनिया ने याद दिलाया कि 1 नवंबर वही तारीख है जब 1984 में सिखों का भीषण कत्लेआम हुआ था, और उन्होंने इस संवेदनशील तारीख पर रैली तय करने को लेकर राहुल गांधी की राजनीतिक समझ और रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े किए।

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