नई दिल्ली। भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर की गणना को लेकर देश के आर्थिक और राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग के एक दावे को आधार बनाकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार पर जीडीपी आंकड़ों में हेरफेर का आरोप लगाया, जिसे केंद्र सरकार के सूत्रों और सांख्यिकी मंत्रालय ने सिरे से खारिज कर दिया है।
दोनों पक्षों के तर्क और आंकड़े
| विषयपूर्व वित्त सचिव / कांग्रेस का दावासरकारी सूत्रों व सांख्यिकी मंत्रालय का जवाब | ||
| वास्तविक GDP विकास दर | 7.8% के बजाय केवल 2.6%। | आधिकारिक आधार पर वास्तविक विकास दर 6.7% से 7.8% है। |
| गणना का तरीका | महामारी-पूर्व डेटा और CAGR के आधार पर अलग बेस का इस्तेमाल। | IMF और विश्व बैंक के मानक सालाना आधार का पालन; मनमाना बेस चुनना सांख्यिकीय रूप से गलत। |
| डेटा हेरफेर का आरोप | पिछले साल के आंकड़ों को कम करके 'बेस इफेक्ट' से ग्रोथ बढ़ाई गई। | बेस-ईयर में बदलाव से कवरेज और डेटा सोर्स अपडेट हुए; पुरानी और नई सीरीज को मिलाना अमान्य। |
| नॉमिनल व रियल GDP | आंकड़ों का प्रेजेंटेशन भ्रामक है। | नॉमिनल GDP ₹80.00 लाख करोड़ से बढ़कर ₹88.27 लाख करोड़ (10.3%) और रियल GDP ₹75.46 लाख करोड़ से ₹81.36 लाख करोड़ (7.8%) हुई। |
पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग का दावा
- कम विकास दर का तर्क: गर्ग के अनुसार, यदि महामारी से पहले के आंकड़ों और चालू तिमाही के बीच चक्रवृद्धि वार्षिक विकास दर (CAGR) या अलग आधार का उपयोग किया जाए, तो वास्तविक आर्थिक वृद्धि महज 2.6% बैठती है।
- बेस इफेक्ट की भूमिका: उनका आरोप है कि सरकार द्वारा दर्शाई जा रही 7% से 8% की विकास दर केवल "बेस इफेक्ट" और डेटा प्रेजेंटेशन का नतीजा है।
- कांग्रेस का हमला: कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि सरकार ने चालू वर्ष की ग्रोथ रेट को artificially बढ़ाने के लिए पिछले साल के जीडीपी आंकड़ों को कम करके दिखाया।
सरकारी सूत्रों और विशेषज्ञों का कड़ा पलटवार
- वैश्विक सांख्यिकीय मानक: सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) और सरकारी विशेषज्ञों के अनुसार, जीडीपी की गणना सालाना (YoY) आधार पर IMF और विश्व बैंक की स्थापित पद्धतियों के अनुसार की जाती है। अवधियों या आधार वर्षों को मनमाने ढंग से मिलाकर गणना करना वैश्विक नियमों के खिलाफ है।
- सीरीज में बदलाव का स्पष्टीकरण: अगस्त 2025 में पुरानी सीरीज के तहत जारी आंकड़ों के बाद बेस-ईयर संशोधन के कारण कवरेज, सेक्टर वेटेज और डेटा सोर्स बदले गए। सूत्रों का कहना है कि पुरानी सीरीज के डिनॉमिनेटर (हर) के साथ नई सीरीज के न्यूमरेटर (अंश) का उपयोग करके सही निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
- जमीनी आर्थिक संकेतक: सरकार ने स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड जीएसटी कलेक्शन, यूपीआई ट्रांजैक्शन में तेजी, मजबूत क्रेडिट ग्रोथ और बुनियादी ढांचे पर पूंजीगत खर्च (Capex) इस बात के ठोस प्रमाण हैं कि अर्थव्यवस्था 6.7% से 7.8% की वास्तविक दर से आगे बढ़ रही है।
आर्थिक और बाजार प्रभाव
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि गैर-मानक तरीकों से तैयार किए गए विश्लेषण बाजार में भ्रम फैलाते हैं और निवेशकों के भरोसे पर असर डालते हैं। सरकार ने दोहराया है कि भारत की जीडीपी गणना पूरी तरह पारदर्शी है और भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।





