नई दिल्ली: केंद्र सरकार के एक आधिकारिक दस्तावेज़ के अनुसार, पिछले 11 वर्षों (2014-15 से 2025-26) के दौरान किसानों को छह प्रमुख रबी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के तहत कुल ₹8.36 लाख करोड़ का भुगतान किया गया है। यह आंकड़ा इससे पहले की 10 साल की अवधि (2004-05 से 2013-14) में हुए ₹2.65 लाख करोड़ के कुल भुगतान की तुलना में करीब तीन गुना अधिक है।
इस अवधि में छह मुख्य रबी फसलों—गेहूं, जौ, चना, मसूर, सरसों और कुसुम—की कुल सरकारी खरीद 2,302 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 3,921 लाख मीट्रिक टन हो गई है। इसमें अकेले गेहूं की खरीद 2,254 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 3,715 लाख मीट्रिक टन दर्ज की गई, जिसके एवज में किसानों को दिया गया भुगतान ₹2.56 लाख करोड़ से बढ़कर ₹7.31 लाख करोड़ तक पहुंच गया है।
अगले रबी विपणन सीजन (2027-28) के लिए बढ़ा हुआ MSP
केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) द्वारा 30 सितंबर को मंजूर किए गए रबी विपणन सीजन 2027-28 के MSP दरों के अनुसार, सभी छह फसलों के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की गई है:
| फसलनया MSP (₹ प्रति क्विंटल)MSP में वृद्धि (₹ प्रति क्विंटल)उत्पादन लागत पर अनुमानित मार्जिन (%) | |||
| गेहूं | ₹2,610 | ₹25 | 106% |
| सरसों | ₹6,613 | ₹413 | 96% |
| मसूर | ₹7,390 | ₹390 | 92% |
| कुसुम | ₹7,215 | ₹675 | - |
| चना | ₹5,958 | ₹83 | 59% |
| जौ | ₹2,286 | ₹136 | 58% |
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अगले रबी सीजन में लगभग 324 लाख मीट्रिक टन उपज की सरकारी खरीद का अनुमान है, जिससे किसानों को सीधे ₹90,962 करोड़ का भुगतान प्राप्त होगा।
चालू सीजन (2026-27) में भी रिकॉर्ड खरीद
चालू रबी विपणन सीजन 2026-27 के दौरान अब तक 357.57 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की जा चुकी है, जिसका कुल मूल्य ₹92,432.51 करोड़ है। इस खरीद से देश भर के 34 लाख से अधिक किसान प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हुए हैं।
सरकार का कहना है कि MSP में यह वृद्धि 2018-19 के बजट में की गई उस घोषणा के अनुरूप है, जिसमें सभी अधिसूचित फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य उनकी उत्पादन लागत का कम से कम डेढ़ गुना (150%) रखने का प्रतिबद्ध संकल्प लिया गया था।
फसल चक्र और बुवाई पर सकारात्मक प्रभाव
किसान संगठनों और कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, बुवाई के सीजन से पहले MSP की अग्रिम घोषणा से किसानों को अपनी फसल चुनने में मदद मिलती है।
- दलहन को बढ़ावा: चना और मसूर के समर्थन मूल्य में हुई बड़ी वृद्धि से किसानों को गेहूं के अलावा दलहनी फसलों का रुख करने का प्रोत्साहन मिलता है।
- मिट्टी की सेहत: फसलों के इस चक्र से खेतों की उर्वरा शक्ति बनी रहती है, जिसका दीर्घकालिक लाभ अगली फसलों की उपज पर पड़ता है।
- मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे प्रमुख राज्यों में गेहूं और सरसों की बड़े पैमाने पर सरकारी खरीद होती है, जहां इस वर्ष भी इन दोनों फसलों का रकबा बढ़ने की पूरी संभावना है।
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