झारखंड।बारिश की कामना को लेकर यज्ञ और हवन का होना तो आम बात है, लेकिन गढ़वा जिले के मेराल में ग्रामीणों ने इंद्र देवता को खुश करने के लिए रीति-रिवाज के साथ दो मेंढकों की शादी करायी।
आपको बता दें कि मेराल प्रखंड के बाना गांव में सोमवार को पुरानी परंपराओं का निर्वहन करते हुए अच्छी बारिश के लिए मेंढक और मेढकी की शादी के लिए गाजे-बाजे के साथ बारात निकाली गयी। यह बारात बाना बाजार से शुरू हुई और देवी मंडप सती स्थान पर जाकर खत्म हुई।प्राचीन रीति रिवाज के अनुसार मेढक और मेढकी की शादी ढोल-नगाड़े एवं वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ करायी गयी। बड़ी संख्या में उपस्थित महिलाओं द्वारा द्वार पूजा से लेकर विवाह की रस्म अदायगी की गयी।
इस संबंध में पंचायत के मुखिया विजय सिंह ने बताया कि इस परंपरा की शुरुआत बाना गांव के जमींदार बाबू महेश्वरनाथ सिंह द्वारा की गयी थी।मुखिया ने बताया कि बुजुर्गां द्वारा कहा जाता है कि 1966 में इलाके में भयंकर अकाल पड़ा था। जिसके बाद 1967 में क्षेत्र में अच्छी बारिश और फसल के लिए बाबू महेश्वरनाथ सिंह द्वारा विधिवत मेंढक और मेढकी का विवाह सती स्थान में कराया गया था। तब से यह परंपरा ग्रामीणों द्वारा लगातार की जाती है, जिसके परिणाम स्वरूप बाना गांव और उसके आसपास के गांव में अकाल का प्रभाव नहीं रहता है और अच्छी बारिश के साथ फसल भी अच्छी होती है।





