हजारीबाग।रामगढ़ से कांग्रेस विधायक ममता देवी को पांच साल की सजा सुनाए जाने के बाद गोला का आईपीएल गोलीकांड एक बार फिर चर्चा में आ गया है।आईपीएल आंदोलन की उपज कही जाने वाली विधायक ममता देवी को आईपीएल गोलीकांड ने ही डूबो दिया।गोला प्रखंड के टोनागातू में इनलैंड पावर प्लांट अवस्थित है।जहां बिजली उत्पादन किया जाता है। प्लांट निर्माण के समय कई ग्रामीण यहां विस्थापित हुए थे। इन विस्थापितों को प्लांट प्रबंधन द्वारा नौकरी, मुआवजा और रोजगार देने का आश्वासन दिया गया था और प्रबंधन कुछ लोगों को नौकरी भी दी थी,लेकिन ग्रामीणों को पर्याप्त सुविधा और रोजगार नहीं दिए जाने पर यहां आंदोलन की सुगबुगाहट शुरू हुई। इसके बाद नागरिक चेतना मंच का गठन कर आंदोलन शुरू किया गया।
29 अगस्त 2016 को हुई थी घटना
तत्कालीन पार्षद सह वर्तमान विधायक ममता देवी एवं झारखंड विकास मोर्चा (वर्तमान में भाजपा नेता) राजीव जायसवाल के नेतृत्व में यहां आंदोलन शुरू किया गया था। कई बार प्लांट के मुख्य द्वार के सामने धरना प्रदर्शन किया गया था।प्रबंधन द्वारा मांगों को नहीं माने जाने के बाद 29 अगस्त 2016 को यहां व्यापक रुप से धरना प्रदर्शन किया गया था।जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे। जिला प्रशासन द्वारा शांतिभंग होने की संभावना को लेकर यहां मजिस्ट्रेट, अधिकारी और बड़ी संख्या में पुलिस बल के जवानों को तैनात किया गया था।इसी बीच देखते ही देखते ग्रामीण उग्र हो गये और प्लांट के इंटेकवेल में तोड़फोड़ शुरू कर दिया।इसके बाद यहां पुलिस और आंदोलन कर रहे लोगों के बीच पथराव के बाद झड़प हुई।देखते ही देखते यह पूरा क्षेत्र युद्ध के मैदान में तब्दील हो गया।पुलिस फायरिंग में दशरथ नायक (50 वर्ष) एवं रामलखन महतो उर्फ फुतू महतो (40 वर्ष) की मौत हो गयी थी।वहीं 43 लोग घायल हुए थे।जिसमें पुलिस प्रशासन के अधिकारी, जवान और ग्रामीण शामिल थे।दो ग्रामीणों की मौत के बाद आक्रोशितों ने गोला के तत्कालीन सीओ के वाहन को जला दिया था।पूरी घटना को लेकर गोला और रजरप्पा थाना में अलग-अलग मामला दर्ज किया गया था।
ऐसे मिला था विधानसभा का टिकट
गोला आईपीएल गोलीकांड का मामला न्यायालय में चल रहा था और इस दरम्यान कई उलटफेर देखे गए।सितंबर 2022 में इसी मामले में ममता देवी को गैर जमानती वारंट भी जारी किया गया था,जबकि एक अन्य मामले में ममता देवी, राजीव जायसवाल समेत आठ लोगों को तीन-तीन माह की सजा सुनायी गयी थी। हालांकि इन लोगों को जमानत देकर रिहा कर दिया गया था,लेकिन रजरप्पा थाना कांड संख्या 79/16 में सजा सुनायी गयी है।गोलीकांड घटना के कुछ दिनों के बाद ममता देवी को पुलिस ने राजधानी रांची से गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।लगभग छह माह जेल में रहने के बाद ममता देवी को जमानत पर रिहा किया गया था।जेल से बाहर आने के बाद रामगढ़ से लेकर गोला तक ग्रामीणों ने भव्य तरीके से ममता देवी का स्वागत किया था। इसके बाद ममता देवी कांग्रेस पार्टी के बड़े नेताओं के नजर में आयीं। इसके बाद ममता रामगढ़ विधानसभा सीट से टिकट देकर प्रत्याशी बनाया गया। 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में ममता देवी ने जीत हासिल कर विधायक बनीं।इसी तरह राजीव जायसवाल को भी रांची के एक होटल से गिरफ्तार किया गया था।राजीव को आठ माह के बाद जमानत मिली थी।
ममता के हैं तीन बच्चे
विधायक ममता देवी के तीन बच्चे है. जिसमें दो बेटी और एक बेटा है।दोनों बेटी में एक दृष्टि कुमारी एवं दूसरी स्नेहा महतो है।एक लगभग चार माह का बेटा है।जिसका नामकरण नहीं हुआ है।
तीन साल में ही विधायक का सफर खत्म
ममता देवी जब रामगढ़ से कांग्रेस प्रत्याशी बनी थी।उस समय यहां आजसू पार्टी का बोलबाला था।किसी को विश्वास नहीं हो पा रहा था कि ममता देवी चुनाव में जीत दर्ज कर पाएंगी,लेकिन वो 2019 में चुनाव जीत गयी।इस तरह लगभग तीन वर्ष में ही विधायक का सफर खत्म हो गया।जितनी तेजी से ममता देवी की लोकप्रियता बढ़ी थी,लेकिन न्यायालय के एक फैसले से सबकुछ धराशायी हो गया।
हाईकोर्ट का खटखटाएंगे दरवाजा
राजीव की मां अहिल्या देवी ने रोते हुए बताया कि मेरा बेटा जन समस्याओं को लेकर आंदोलन का नेतृत्व किया था, लेकिन इसे राजनीतिक साजिश के तहत प्रबंधन द्वारा फंसाया गया। उन्होंने कहा कि बेटे की रिहाई के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटायेंगे।
आवास एवं कार्यालय में सन्नाटा पसरा
गोला स्थित विधायक ममता देवी के आवास और कार्यालय में सन्नाटा पसर गया है।एक भी कार्यकर्ता और समर्थक यहां नजर नहीं आए। मंगलवार सुबह से ही रामगढ़ जिले के सभी चौक-चौराहों और जगह-जगह पर गोला गोलीकांड की चर्चा की जा रही थी।साथ ही लोग इनके सजा को लेकर भी कयास लगा रहे थे।आखिरकार इस मामले में अभियुक्तों को सजा हुई। मालूम हो कि इस मामले में जिन 13 लोगों को सजा हुई है। उनमें सिर्फ तीन लोग ही चर्चित है। जिसमें विधायक ममता देवी, भाजपा नेता राजीव जायसवाल और मनोज पूजहर शामिल है।बाकी दस लोगों को क्षेत्र के अधिकांश लोग पहचानते तक नहीं है।





