वाराणसी।भारतीय संस्कृति का सनातन धर्म और 33 कोटि देवी देवताओं में भगवान शिव ही देवाधिदेव महादेव की उपमा से अलंकृत माने गए हैं।सावन माह भगवान शिव जी को समर्पित है। भगवान शिव की अर्चना के लिए सावन माह सबसे अच्छा माना जाता है।शिवालय सर्वत्र प्रतिष्ठित हैं जिनके दर्शन मात्र से ही आलोक एक शांति मिलती है लेकिन आध्यात्मिक नगरी काशी में बाबा काशी विश्‍वनाथ के साथ ही बारहों शिव के स्‍वरूपों के ज्‍योतिर्लिंग विद्यमान माने गए हैं।बारहों ज्‍योतिर्लिंग का मान काशी में शिव भक्त द्वादश ज्योतिर्लिंग के दर्शन पूजा से लाभ करते हैं।ऐसा माना जाता है कि 12 ज्योतिर्लिंग यहां काशी में साक्षात मूल स्‍वरूप में ही मौजूद हैं। इनमें पहले स्थान पर सोमनाथ महादेव मान मंदिर, दूसरे स्थान पर मल्लिकार्जुन महादेव सिगरा, तीसरे स्थान पर महाकालेश्वर महादेव दारानगर, चौथे स्थान पर केदारनाथ महादेव केदार घाट, पांचवें स्थान पर भीमशंकर महादेव नेपाली खपड़ा, छठवें स्थान पर विश्वेश्वर महादेव विश्वनाथ गली, सातवें स्थान पर त्रंबकेश्वर महादेव हौज कटोरा बांस फाटक, आठवें स्थान पर बैजनाथ महादेव बैजनत्‍था, नौवें स्थान पर नागेश्वर महादेव पठानी टोला, दसवें स्थान पर रामेश्वरम महादेव रामकुंड, 11वें स्थान पर घुश्‍मेश्‍वर महादेव कमच्‍छा और 12वें स्थान पर ओंकारेश्वर महादेव छित्‍तनपुर में मौजूद हैं।



आध्यात्मिक नगरी काशी में अन्‍य शिवालयों में 50 से ज्यादा शिव मंदिर या शिवालय सिद्ध माने गए हैं। जिनमें ओम्कारेश्वर पठानी टोला, त्रिलोचनेश्वर- त्रिलोचन, आदि महादेव-त्रिलोचन महादेव के पीछे, कृतिवासेश्‍वर महादवेव-हर तीरथ, रत्नेश्वर महादेव- वृद्ध काल, चंदेश्वर-सिद्धेश्वरी, केदारेश्वर-केदार घाट, धर्मेश्वर मीरघाट, वीरेश्वर सिंधिया घाट के ऊपर, कामेश्वर-त्रिलोचन के उत्तर, विश्वकर्मेश्वर-गोलगड्डा, मणि कर्णेश्‍वर-गोमठ आश्रम, अविमुक्तेश्वर- धर्मशाला विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र, विश्‍वेश्‍वर- विश्व प्रसिद्ध विश्वनाथ मंदिर, अमृतेश्वर-नीलकंठ महादेव, तारकेश्वर ज्ञानवापी के पूर्व गौरीशंकर मढ़ी के नीचे, ज्ञानेश्वर-लाहौरी टोला, करुणेश्वर-ललिता घाट के ऊपर, मोक्षद्वारेश्‍वर - करुणेश्वर के समीप, स्वर्गद्वारेश्वर-ब्रह्मनाल के समीप, ब्रह्मेश्वर-खालिसपुर बंगाली टोला, लांगलीश्‍वर-खोवा बाजार, वृद्धकालेश्वर- महामृत्युंजय परिसर दारानगर, वृषेश्‍वर- गोरखनाथ टीला मैदागिन, चंडीश्वर- सदर बाजार चंडी देवी के समीप, नंदिकेश्वर- ज्ञानवापी पर लुप्‍त, महेश्वर-मणिकार्णिका कुंड के पूर्वी तट पर, ज्योति रूपेश्‍वर-गोमठ, शैलेश्वर -मढियाघाट शैलपुत्री, संगमेश्वर - आदिकेशव वरुणा में, स्‍वर्लीनेश्‍वर- नया महादेव, प्रहलाद घाट, मध्यमेश्वर-दारानगर, हिरण्यगर्भेश्‍वर-त्रिलोचन त्रिलोचन घाट, ईशानेश्‍वर बांस फाटक, गोप्रेक्षेश्वर-लालघाट, वृषभेश्वर-कपिलधारा, उपशांतेश्वर-पठानी टोला, ज्‍येष्‍ठेश्‍वर- काशीपुरा, निवासेश्वर-भूत भैरव के पास काशीपुरा, शुक्रेश्वर-कालिका गली, व्याघ्रेश्वर-भूत भैरव, जंबुकेश्वर-बड़ा गणेश, महामृत्युंजय- मध्‍यमेश्‍वर दारानगर, नए विश्वनाथ-मीर घाट, नए विश्वनाथ-बीएचयू परिसर, बैजनाथ-बैजनत्‍था, जंगम-जंगम बाड़ी मठ, मल्लिकार्जुन-सिगरा, भीमशंकर-नेपाली खपड़ा, त्र्यंबकेश्‍वर- हौज कटोरा बांस फाटक, नागेश्वर-पठानी टोला, रामेश्वरम-रामकुंड, घुश्मेश्वर- कमच्‍छा, ओमकारेश्वर- छित्‍तनपुर और इसके अलावा पंचक्रोशी मार्ग में पड़ने वाले अनेक शिव मंदिर की महत्ता मानी गई है।