गढ़वा।झारखंड और छत्तीसगढ़ की सीमा के बीच स्थित बूढ़ा पहाड़ लगभग 3 दशक से नक्सलियों का एक प्रमुख केंद्र बना रहा है। बीते साल सितंबर महीने में लंबे अभियान के बाद बूढ़ा पहाड़ को सुरक्षाबलों के द्वारा नक्सल मुक्त करा लिया गया है।बता दें कि जिस बूढ़ा पहाड़ पर जाने से पहले सरकार के अधिकारी, कर्मचारी तक डरते थे।दुर्गम, दुर्दांत बूढ़ा पहाड़ पर आखिरकार 22 साल बाद शुक्रवार को सरकार के कदम पड़ ही गए।घने जंगलों में छिपा ये पहाड़ वो इलाका था जहां कभी नक्सलियों की अदालतें लगती थी और कुख्यात नक्सली अरविंद का हुक्म चलता था। नक्सली अपने फैसले सुनाते थे और जंगल में रहने वाली गरीब आदिवासी जनता इन फैसलों का पालन करने को मजबूर थी।
पुलिस यहां आती नहीं थी,अधिकारी तो आस-पास भी नहीं फटकते थे,पुलिस-अधिकारी आते भी कैसे,घने जंगलों, गुफाओं से घिरे इस पहाड़ तक आने का कोई रास्ता ही नहीं था।ऊपर से नक्सलियों का आतंक।सरकार के कानून बूढ़ा पहाड़ तक आते-आते दम तोड़ देते थे।अब 22 साल बाद झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पूरी मशीनरी के साथ इस जगह पर पहुंचे हैं और इस इलाके के विकास के लिए 100 करोड़ रुपये की योजनाओं का ऐलान किया है।
बता दें कि बूढ़ा पहाड़ झारखंड में स्थित एक क्षेत्र है। झारखंड की राजधानी रांची से लगभग 150 किलोमीटर दूर नक्सल प्रभावित रहे लातेहार और गढ़वा जिलों के साथ स्थित बूढ़ा पहाड़ को 30 साल के बाद सुरक्षा बलों ने लाल आतंक से मुक्त कराया था।इस इलाके की सीमाएं झारखंड के पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ से भी मिलती है।छत्तीसगढ़ में जब नक्सली खदेड़े जाते हैं तो वे इधर ही भागते हैं। नक्सलवाद से प्रभावित देश के 9 राज्यों के लगभग 60 जिलों के इलाकों को लाल गलियारा कहा जाता था।इन इलाकों में नक्सलियों के आतंक को ही लाल आतंक कहा जाता था।हाल के सालों में रेड टेरर का असर काफी कम हुआ है।
नक्सलियों का सेफ मांद बन चुका बूढ़ा पहाड़ से नक्सलियों को खदेड़ने के लिए अप्रैल 2022 में स्थानीय पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों ने ऑपरेशन चलाया।सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच जबरदस्त भिड़ंत हुई।इस भिड़ंत में 14 नक्सली मारे गए थे।अधिकारियों के मुताबिक इस ऑपरेशन के दौरान 590 नक्सलियों ने या तो सरेंडर किया या फिर वे गिरफ्तार कर लिए गए। नक्सलियों के खिलाफ अप्रैल में शुरू हुआ ये मिशन सितंबर में पूरा हुआ जब सीआरपीएफ ने इस पहाड़ को नक्सलियों से मुक्त करा दिया। बूढ़ा पहाड़ के इलाकों में कई बड़े इनामी नक्सलियों की सक्रियता रहती थी।इनमें 25 लाख के इनामी नक्सली कमांडर मारकुश बाबा उर्फ सौरभ , 15 लाख का इनामी छोटू खरवार ,नीरज खरवार ,रविंद्र गंझू है, जबकि, 10 लाख के इनामी मृत्युंजय भुइयां सहित कई बड़े नक्सलियों का बूढ़ा पहाड़ पनाहगाह बना हुआ था।
सीआरपीएफ डीजी ने इस ऑपरेशन की जानकारी देते हुए कहा था कि झारखंड के बूढ़ा पहाड़ को नक्सलियों से मुक्त कराने के लिए ऑपरेशन ऑक्टोपस,ऑपरेशन बुलबुल और ऑपरेशन थंडर चलाया गया था।जब ये पहाड़ नक्सलियों के चंगुल से मुक्त हुआ तो गृह मंत्री अमित शाह ने खुद ट्वीट कर इसके लिए सीआरपीएफ को बधाई दी थी।अमित शाह ने कहा था कि पहली बार बूढा पहाड़, चक्रबंधा और भीमबांध के दुर्गम क्षेत्रों से माओवादियों को सफलतापूर्वक निकालकर सुरक्षाबलों के स्थाई कैंप स्थापित किए गए हैं।
गांव वालों में नक्सलियों का खौफ न हो इसलिए सीआरपीएफ ने इस जगह पर एक स्थायी कैंप बनाने का फैसला किया है। यहां नक्सलियों द्वारा बिछाए गए लैंड माइंस में कई बार झारखंड पुलिस और सुरक्षा बल चपेट में आए हैं। 2018 में जब पुलिस ने बूढ़ा पहाड़ पर चढ़ने की कोशिश की थी तो नक्सलियों ने लैंड माइन ब्लास्ट किया था।इस ब्लास्ट की चपेट में कई पुलिसकर्मी आए थे।साल 2021-22 में बूढ़ा पहाड़ आखिरी धावे के लिए पुलिस और सुरक्षा बलों ने रणनीति बनाई थी।इसके तहत पहले बूढ़ा पहाड़ के तराई वाले इलाकों में सुरक्षा बलों ने कैंप स्थापित किया और नक्सलियों पर हमला किया।इसके बाद नक्सली अपने मांद से निकलने को मजबूर हो गए और सुरक्षा बलों की चंगुल में फंसने को मजबूर हो गए।
पुलिस के अनुसार 1990 के दशक से बूढ़ा पहाड़ पर नक्सलियों का कब्जा था और तब तो स्थिति और भी गंभीर थी।घने जंगल और भी ज्यादा थे और यहां हमेशा सेंट्रल कमेटी के नक्सलियों का अड्डा होता था।पुलिस ने बीच-बीच में कई अभियान चलाए,लेकिन कभी भी बूढ़ा पहाड़ पर सुरक्षा बलों का कब्जा नहीं हो सका।
शुक्रवार को झारंखड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का हेलिकॉप्टर बूढ़ा पहाड़ की चोटी पर पहुंचा जहां सीआरपीएफ ने कैंप बनाया है।दरअसल पर्वतों को पार करके भी बूढ़ा पहाड़ की चोटी पर पहुंचना अभी भी आसान नहीं है।यहां या तो हवाई मार्ग से पहुंचा जा सकता है या फिर चॉपर के सहारे या फिर यहां के स्थानीय ग्रामीणों की तरह नंगे पांव।यहां के ग्रामीण कई घंटे चलकर सीएम को सुनने पहुंचे थे।सीएम सोरेन ने कहा है कि यहां के लोगों को बंदूके नही बल्कि सरकार की योजनाओं का लाभ उठाना चाहिए।
झारखंड सरकार के अधिकारियों ने कहा कि 100 करोड़ रुपये की बूढ़ा पहाड़ विकास परियोजना (बीपीडीपी) गढ़वा में टिहरी पंचायत के 11 गांवों और लातेहार में अक्सी पंचायत के 11 गांवों को कवर करेगी। इस 100 करोड़ रुपए से यहां सरकार ने 175 योजनाएं शुरू की है। सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि जरूरत पड़ने पर इस राशि को बढ़ाकर 500 करोड़ किया जाएगा।





