नई दिल्ली: देश की अधीनस्थ न्यायपालिका को मजबूत करने और अनुभवी जजों की सेवाएं बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने देश के 14 राज्यों द्वारा जिला न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष करने पर अपनी सहमति व्यक्त करने पर गहरा संतोष व्यक्त किया है। शीर्ष अदालत ने उम्मीद जताई है कि अन्य राज्य भी इस जनहितैषी और न्याय-सम्मत कदम का जल्द ही अनुसरण करेंगे।

व्यक्तिगत अर्जियों पर तुरंत सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने उन न्यायिक अधिकारियों की व्यक्तिगत अर्जियों को तुरंत सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया, जो हाल ही में सेवानिवृत्त हुए हैं या जल्द होने वाले हैं। पीठ ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा सीधे तौर पर न्यायालय और राज्यों के बीच संवाद और नीतिगत सहमति से जुड़ा है। अदालत राज्यों को अपने सुझावों पर विचार करने के लिए राजी कर रही है, इसलिए व्यक्तिगत याचिकाओं पर अलग से विचार करने का यह सही समय नहीं है।

वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार द्वारा प्रतिदिन हो रहे रिटायरमेंट का हवाला देने पर पीठ ने दोहराया कि मुख्य याचिका पहले से ही सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।

14 राज्यों की सहमति और सेवा नियमों में संशोधन की शर्त

शीर्ष अदालत ने पूर्व आदेशों का संदर्भ देते हुए बताया कि छत्तीसगढ़, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, सिक्किम, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों सहित कुल 14 राज्यों ने इस बदलाव पर सहमति दे दी है।

  • पुनर्बहाली का विकल्प: 31 मार्च या उसके बाद सेवानिवृत्त हुए योग्य न्यायिक अधिकारियों को सेवा में वापस लौटने का विकल्प दिया जाएगा, बशर्ते उन्होंने इस दौरान कोई अन्य पद या नौकरी न स्वीकार की हो।
  • उपयुक्तता का आकलन: संबंधित उच्च न्यायालय (High Court) द्वारा न्यायिक अधिकारी के कार्य प्रदर्शन और उपयुक्तता के आकलन के बाद ही 62 वर्ष की आयु तक सेवा का लाभ मिलेगा।
  • नियमों में बदलाव: न्यायालय ने राज्यों को निर्देश दिया है कि वे अपने सेवा नियमों में दो महीने के भीतर आवश्यक संशोधन पूरे करें। संशोधन लंबित रहने के दौरान 60 वर्ष की आयु पूरी कर चुके योग्य अधिकारियों को सेवानिवृत्त नहीं किया जाएगा।

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'वेतन और भत्ते का बहाना न्याय व्यवस्था में नहीं चलेगा'

राज्यों की ओर से अक्सर यह तर्क दिया जाता है कि सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाने से खजाने पर वेतन और पेंशन का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि न्याय व्यवस्था को बेहतर बनाने के मामले में वित्तीय बोझ या बजट की कमी का बहाना स्वीकार नहीं किया जाएगा।

पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति

वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट के जज 65 वर्ष और हाई कोर्ट के जज 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं। जिला न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति उम्र 62 वर्ष करने का प्रस्ताव न्यायमूर्ति के. जगन्नाथ शेट्टी आयोग द्वारा 2002 में भी दिया गया था। अब शीर्ष अदालत के इस सकारात्मक रुख के बाद आंध्र प्रदेश, बिहार, दिल्ली, यूपी, पंजाब और राजस्थान सहित अन्य राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों पर भी अपने सेवा नियमों पर पुनर्विचार करने का दबाव बढ़ गया है।

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