प्रतिनिधि,हजारीबाग। विनोबा भावे विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट सभागार में कुलपति-शोधार्थी सीधी वार्ता का आयोजन पूर्वाह्न 11बजे से किया गया। कुलपति प्रो. (डॉ.) अजीत कुमार सिन्हा ने सभी शोधार्थियों की बात को धैर्य पूर्वक सुना तथा अपनी डायरी में नोट किया। अंत में अपने विचार रखते हुए कुलपति ने कहा कि शोधार्थियों की अधिकांश समस्याएं विश्वविद्यालय की व्यवस्था से संबंधित हैं। वह आज से ही उसमें सुधार लाने का काम करेंगे। उन्होंने आह्वान किया कि शोधार्थी अपने शोध को गंभीरता से लें और इस कार्य को इमानदारी से करें, जो शोधार्थी सरकार से फेलोशिप ले रहे हैं उनसे कुलपति ने कहा कि उनकी जिम्मेदारी अधिक हैं। यह भी कहा कि केवल पीएचडी उपाधि के लिए नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र को कुछ देने के लिए शोध करें। कुलपति ने शोधार्थियों को मोबाइल फोन के दुष्प्रभाव से बचने का आग्रह किया। उन्होंने बहुत जल्द एक और बैठक आयोजित करने की बात कही।





शोधार्थियों में से मिताली गुप्ता, भैरव यादव, संगीता कुमारी सिंह, फातिमा प्रवीण, मनोज कुशवाहा, अभिषेक मिश्र, उदय कुमार मेहता, रुखसाना बानो, जितेंद्र भारती, धर्मेंद्र कुमार, पुष्कर कुमार, विभा कुमारी तथा फजल ने अपनी परेशानी को रखा।





यूजीसी फैलोशिप के लिए प्रत्येक महीने की उपस्थिति का ससमय यूजीसी के साइट पर अपलोड करना, आवासीय किराया 8 % से बढ़ाकर अन्य विश्वविद्यालयों की भांति 9% करना, पुरानी टॉपिक पर पुनः पंजीयन की अनुमति प्रदान करना, गैर फेलोशिप वाले शोधार्थियों को विश्वविद्यालय की ओर से आर्थिक सहयोग उपलब्ध करवाना, जेआरएफ से एसआरएफ संबंधी कार्य प्रक्रिया को विश्वविद्यालय स्तर पर ससमय पूर्ण करना आदि मांगे वक्ताओं की ओर से रखी गई।वहीं वक्ताओं ने शिकायत की कि पिछले 3 वर्षों से विभावि में एक तरफ जहां कोई स्तरीय संगोष्ठी, कार्यशाला आदि का आयोजन नहीं हो पाया।वहीं दूसरी तरफ विभागीय व केंद्रीय पुस्तकालयों में कोई भी पुस्तक, जर्नल आदि का क्रय भी नहीं हुआ। इससे शोध को काफी क्षति हुई। यह भी कहा कि एक कर्मचारी शोधार्थियों का बहुत आर्थिक शोषण किए हैं एवं हाल में हुए उनके स्थानांतरण का स्वागत भी किया। पिछले 3 वर्षों में शोधार्थियों से काम के एवज में पैसे मांगे जाने की भी बात कही गई।





वार्ता में संकायअध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षक के अलावा बड़ी संख्या में शोधार्थी उपस्थित थे। धन्यवाद ज्ञापित करते हुए शोधार्थी पुष्कर ने कहा कि पिछले 3 वर्षों में यह पहला मौका है जब शोधार्थीयों कि बातें सुनी जा रही हैं। वार्ता का संचालन डॉ. गंगानाथ झा ने किया।