जलवायु परिवर्तन तथा अन्य चुनौतियों के संदर्भ में जल संरक्षण के आविष्कृत तकनीकी पर कार्यशाला
जल संरक्षण की दिशा में सरकारी प्रयासों को गति और अभियान की सफ़लता के लिए जनभागीदारी जरुरी: उपविकास आयुक्त
प्रतिनिधि,हज़ारीबाग़। जलवायु परिवर्तन तथा अन्य चुनौतियों के संदर्भ में जल संरक्षण के आविष्कृत तकनीकी विषय पर कार्यशाला का आयोजन नगर भवन में किया गया।
ग्रामीण विकास विभाग हजारीबाग के तत्वावधान में वैश्विक जल संरक्षण की समस्या विषय पर जल संसाधन के संरक्षण एवं संवर्द्धन के प्रभावी एवं इकोफ्रेंडली उपायों पर बतौर प्रमुख विशेषज्ञ वक्ता के रूप में महेंद्र गिरी, सेवानिवृत्त डीजीपी उत्तर प्रदेश तथा वर्तमान में जल संरक्षण सलाहकार, उत्तर प्रदेश एवं अंतरराष्ट्रीय सलाहकार पीडब्ल्यूसीडीएफ स्वीडन के द्वारा नगर निगम हजारीबाग सहित सदर हजारीबाग, बरही, कटकमदाग, दारु प्रखंड के नव निर्वाचित पंचायत जनप्रतिनिधि यथा जिप उपाध्यक्ष, जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, वार्ड पार्षद एवं मुखिया, प्रमुख आदि को जल संरक्षण की तकनीक के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
उन्होंने बताया शुद्ध पेयजल सहित सतही व भूमिगत जलस्तर की विकराल होती वैश्विक समस्या के लिए प्रभावी एवं कम लागत से जल संरक्षण एवं उसके संवर्धन के लिए उनके द्वारा आजमाए गए जीरो कॉस्ट एवं इको फ्रेंडली तकनीक को अपनाने पर जोर देते हुए कहा बिना लोगों की भागीदारी के जल संरक्षण की मुहिम को मुकाम तक पहुंचाना संभव नहीं है। इसके लिए आम लोग इस अभियान से जुड़े। व्यक्तिगत एवं सामुदायिक प्रयास से ख़ासकर छोटे-छोटे समूह बनाकर अपने आसपास एवं आवासीय परिसर में जल संरक्षण की दिशा में पहल करने की आवश्यकता पर बल दिया। लोग दैनिक जीवन, लाइफस्टाइल और सोच में बदलाव लाने को कहा। उन्होंने वर्कशॉप के दौरान घर का घर में, खेत का पानी खेत में, गांव का पानी गांव में कैसे संरक्षित कर भविष्य को सुरक्षित करते हुए स्थाई विकास के मॉडल को अपनाया जा सकता है। इस विषय पर ज़ीरो कॉस्ट व इकोफ्रेंडली मॉडल के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। साथ ही कहा जल संरक्षण चर्चा का विषय नहीं है इस दिशा में सबकी भागीदारी और हर स्तर पर जागरूक हो कर सतत प्रयासों की आवश्कता है।
इस अवसर पर उप विकास आयुक्त प्रेरणा दीक्षित ने कहा जल संरक्षण के लिए सरकार के द्वारा कई स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार के द्वारा योजनाओं के क्रियान्वयन में जल संरक्षण एवं पर्यावरण के संरक्षण एक महत्वपूर्ण पहलू होता है। उन्होंने कहा लोग जल संरक्षण के महत्व को समझें आगे आकर अभियान में शामिल हो। श्रमदान करें प्रशासन हमेशा सहयोग करेगा। बिना लोगों की भागीदारी के जल संरक्षण अभियान सफ़ल नहीं हो सकता है। आदतों में बदलाव के साथ साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए भी नैतिक जिम्मेदारी निभाएं। उन्होंने विकास के मॉडल को इको फ्रेंडली मॉडल बनाने के लिए विस्तृत नवीनतम तकनीक को अपनाने की आवश्यकता बताई। सुरक्षित भविष्य एवं आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करते हुए विकास के कार्यों को बढ़ाने के लिए लोगों से अपील की।





