रांची। झारखंड बिजली वितरण निगम ने रांची के केंद्रीय उपक्रम हैवी इंजीनियरिंग कारपोरेशन की बिजली को काट दिया है।एचईसी का 126 करोड़ रुपये का बिल बकाया है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा डीवीसी का बकाया सीधे झारखंड के आरबीआई खाते से काटे जाने की यह प्रतिक्रिया है।

सात अगस्त को एचईसी को नोटिस भी भेजी गई थी।बिजली बिल के बकाये भुगतान को न करने पर बिजली काटने की नोटिस दी गई।अभी बिजली की एचटी की आपूर्ति रुकी है। बिजली कटौती का अभी रिहायशी इलाके पर असर नहीं है।एचईसी लगातार वित्‍तीय समस्‍याओं से जूझ रहा है और आर्थिक हालत ठीक न होने की वजह से यहां के कर्मचारियों को समय पर वेतन भी नहीं मिल पा रहा है।समय पर वेतन न मिलने को लेकर लगातार धरना-प्रदर्शन भी होता रहता है।



लंबे समय से चल रहे डीवीसी के बिजली बिल के बकाये की किश्त के रूप में झारखंड सरकार के खाते से केंद्र ने 714 करोड़ रुपये काट लिए हैं। झारखंड सरकार इसे भेदभाव करने की तरह व्यवहार बताते हुए विरोध जता रही है। वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव का कहना है कि भाजपा शासित प्रदेशों में डीवीसी के करोड़ों रुपया बकाया होने के बावजूद भी केंद्र सरकार उन राज्यों के पैसे नहीं काट रही है, जबकि झारखंड के साथ सख्ती बरती जा रही है। 10 महीने पहले झारखंड के खाते से बकाये की पहली किश्त के रूप में 1417 करोड़ रुपये काटे गए थे।



इससे पहले झारखंड पर डीवीसी का बकाया साढ़े पांच हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। जनवरी 2021 से झारखंड सरकार हर महीने 125 करोड़ रुपये का भुगतान कर रही है। इसके बाद भी दूसरी किश्त के रूप में आरबीआई ने 714 करोड़ रुपये झारखंड के खाते से काट कर केंद्र सरकार को रकम भेज दी है।केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने शेष 2100 करोड़ रुपये के भुगतान के लिए झारखंड सरकार को नोटिस भी भेजा है। झारखंड के वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव ने इस पर आपत्ति जताते हुए इसे गलत बताया है।



वर्ष 2017 में केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय, झारखंड सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के बीच हुए त्रिपक्षीय करार में ये शर्त रखी गई थी कि बकाया भुगतान नहीं होने पर राज्य सरकार के खाते से बकाया पैसा काट लिया जाएगा। इधर, पहली किश्त काटे जाने के बाद झारखंड सरकार ने जनवरी 2021 में कैबिनेट की बैठक के दौरान इस करार को अपनी तरफ से रद करते हुए केंद्र को जानकारी दी। साथ ही ऊर्जा मंत्रालय और आरबीआई को पत्र लिखकर भविष्य में बकाया पैसा केंद्र के खाते से नहीं काटने का आग्रह किया। इसके बाद से हर महीने 125 करोड़ रुपये का भुगतान करना शुरू किया गया। उधर केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने झारखंड सरकार से कहा कि करार त्रिपक्षीय है, इसलिए एक पक्षीय फैसले से खत्म नहीं हो सकता।